कार्बिड गन से आंखें खराब (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
नागपुर

आंखों को नुकसान पहुंचा रही कार्बाइड गन! 1200 मामले आए सामने, मेडिकल में 4 संदिग्धों का ऑपरेशन

Carbide Guns Harming Eyes: दिवाली के वक्त पटाखों के तौर पर कार्बाइड गन का इस्तेमाल करने और उससे होने वाली दुर्घटना के 3 मामले सामने आए हैं।

प्रिया जैस

Nagpur News: गड़चिरोली जिले के 12 वर्षीय बालक की आंख गंभीर रूप से जख्मी होने के बाद उसकी मेडिकल में सर्जरी की गई। हालांकि मेडिकल के डॉक्टरों ने कार्बाइड गन की भूमिका से इनकार किया है। उन्होंने बताया कि मंगलवार रात दिवाली मनाते समय पाइप में रखे विस्फोटकों से चेहरा जलने के कारण एक बालक की आंख जख्मी हो गई। उसे नेत्र रोग विभाग में भर्ती कराया गया।

डॉक्टरों ने बताया कि विभाग ने मंगलवार और बुधवार की रात आंखों की चोट से पीड़ित 10 से अधिक बच्चों का इलाज किया, जिनमें से 5 को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ी। इसके साथ ही नागपुर जिले के 2 ऐसे ही मामले सामने आये। दोनों की आंखें जख्मी हो चुकी थीं। इनमें से एक की उम्र 14 और दूसरे की उम्र 30 वर्ष बताई गई। दोनों का तत्काल ऑपरेशन किया गया। बताया गया कि कम आयु के मरीज की पूरी पुतली सफेद हो चुकी थी। बाद में बैंडेज कॉन्टैक्ट लेंस से उसे पूर्ववत किया गया।

छिंदवाड़ा से भी एक रेफर

पता चला है कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कार्बाइड गन के कारण लगभग 20 लोगों ने आंखों की रोशनी गंवा दी। इन्हीं में से एक मरीज नागपुर रेफर किया गया। मेडिकल के नेत्र रोग विभाग में उसे लाया गया। मरीज की उम्र 21 वर्ष है। पटाखे से जख्मी उसकी आंख का ऑपरेशन किया गया। जो घातक बारूद आखों के भीतर कॉर्निया तक पहुंची थी उसे साफ किया गया। तत्काल ऑपरेशन होने से इस मरीज की आंख बच सकी। यह कार्बाइड गन के कारण ही हुआ, डॉक्टरों ने पुष्टि नहीं की।

एआईओएस ने जारी की एडवाइजरी

इस बीच नेत्र विशेषज्ञों की संस्था अखिल भारतीय नेत्र रोग विशेषज्ञ समिति (एआईओएस) ने एक एडवाइजरी जारी कर देश भर के डॉक्टरों से कार्बाइड गन से होने वाली चोटों की तत्काल रिपोर्टिंग करने का आग्रह किया। शाम तक 1,200 मामले सामने आए, जिनमें से ज्यादातर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के पुणे, बिहार, झारखंड, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब से हैं। छठ पूजा के दौरान मामलों में तेजी आने की संभावना है।

मध्य प्रदेश सरकार ने दिवाली के दौरान इस्तेमाल होने वाली कैल्शियम कार्बाइड गन की बिक्री, खरीद और निर्माण पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि राज्य भर में लगभग 300 लोगों की आंखों की रोशनी को खतरा पहुंचाने वाली चोटें आई हैं। इस गन का इस्तेमाल आमतौर पर किसान बंदरों और पक्षियों को भगाने के लिए करते हैं। यह विस्फोटकों से भरे पीवीसी पाइप हैं। जब कार्बाइड पाउडर और पानी मिलाया जाता है, तो एसिटिलीन गैस बनती है। कुछ लोग इन बंदूकों को ई-कॉमर्स साइट्स पर बेच रहे हैं।

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