Nagpur APMC National Market: राज्य सरकार की ओर से 2 जून 2026 को एक अधिसूचना जारी कर नागपुर APMC को 'राष्ट्रीय महत्व का बाजार' घोषित किया गया है। इसके विरोध में नागपुर APMC की कार्यकारी समिति के सदस्य अजय गणपत राऊत, अहमदभाई करीमभाई शेख और अन्य ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, याचिका में याचिकाकर्ताओं की ओर से नई अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की। इस पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश प्रफुल्ल खुबालकर ने नागपुर कृषि उत्पन्न बाजार समिति को 'राष्ट्रीय महत्व का बाजार' घोषित करने वाली राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे अधि। एएम घारे ने अदालत में तर्क दिया कि सरकार ने यह अधिसूचना महाराष्ट्र कृषि उपज विपणन (संशोधन) अधिनियम, 2025 की धारा 5-1A के तहत बिना आवश्यक नियम बनाए ही जल्दबाजी में लागू कर दी है। उन्होंने अदालत को बताया कि इस अधिसूचना के परिणामस्वरूप संशोधन अधिनियम 2025 की धारा 5-1B (5) के तहत मौजूदा बाजार समिति का कामकाज ठप हो जाएगा और भंग होने की कगार पर आ जाएगी। इसके अलावा, 1963 के मूल अधिनियम की धारा 15A के तहत बाजार में एक प्रशासक नियुक्त किए जाने की भी आशंका है। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह भी था कि इन नए कानूनों की वैधानिकता को उनकी याचिका में पहले ही चुनौती दी जा चुकी है, इसलिए अधिसूचना पर रोक लगनी चाहिए,
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील एनएस राव ने रोक की मांग का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने अदालत को आश्वस्त किया कि 2 जून की अधिसूचना पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी की गई है।
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दोनों पक्षों की दलीलों के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपनी याचिका में संशोधन करने के लिए एक सप्ताह की अनुमति तो दे दी लेकिन सरकारी अधिसूचना पर कोई भी रोक लगाने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संशोधन अधिनियम 2025 की धारा 5-1A, 5-1B और 5-1C वर्तमान में कानून का हिस्सा है और सरकार ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए ही यह अधिसूचना जारी की है।