पुलिसकर्मी और तैराक तालाब के किनारे खड़े हैं (सोर्स: सोशल मीडिया)
नागपुर

जांबाज तैराकों और पुलिस की तत्परता से बची जान: अंबाझरी तालाब में कूदी 16 वर्षीय छात्रा को सुरक्षित निकाला गया

Suicide Attempt Saved: नागपुर के अंबाझरी तालाब में तनाव के चलते कूदी 16 वर्षीय छात्रा को पुलिस की त्वरित सतर्कता और शार्क एक्वाटिक क्लब के जांबाज तैराकों ने सुरक्षित बचा लिया।

वेदांत जोशी

Ambazari Lake Rescue Operation: एक 16 साल की बच्ची का जिंदगी से भरोसा उठ जाना और अपने माता-पिता को यह लिखकर भेज देना कि 'आई-बाबा, यह मेरा आखिरी मैसेज है'... किसी भी परिवार के लिए यह सपना भी किसी दुःस्वप्न जैसा है। नागपुर के सीताबर्डी इलाके में रहने वाली 11वीं की छात्रा के परिवार पर भी बुधवार की सुबह कुछ ऐसा ही पहाड़ टूट पड़ा। लंबे समय से सिरदर्द की बीमारी और उसके मानसिक तनाव से जूझ रही इस किशोरी ने तड़के चुपचाप घर छोड़ दिया और आत्महत्या के इरादे से निकल पड़ी।

मैसेज मिलते ही पुलिस का क्विक एक्शन

सुबह करीब 6:30 बजे जब पिता की आंख खुली और उन्होंने अपने फोन पर बेटी का व्हाट्सएप मैसेज देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना एक पल गंवाए उन्होंने सीताबर्डी पुलिस से संपर्क किया। मामला बेहद नाजुक था, इसलिए पुलिस प्रशासन भी तुरंत अलर्ट मोड पर आ गया। पुलिस ने समय बर्बाद न करते हुए इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगालने शुरू किए। फुटेज ट्रैक करते-करते पुलिस को छात्रा के अंबाझरी तालाब की तरफ जाने का सुराग मिला। सीताबर्डी पुलिस ने फौरन अंबाझरी पुलिस को अलर्ट किया और इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।

तालाब में छलांग और तैराकों का देवदूत बनना

सुबह के करीब 9:30 बज रहे थे। छात्रा अंबाझरी तालाब के किनारे पहुंची और पानी में छलांग लगा दी। उस वक्त तालाब में शार्क एक्वाटिक क्लब के युवा तैराक अक्षय नवले, इशांत पांडे, राजनंदिनी समर्थ, लावण्या राऊत, राहुल लांजेवार और श्रीमथ मुले अपनी रोजाना की प्रैक्टिस कर रहे थे। जैसे ही उन्होंने पानी में हलचल देखी और छात्रा को डूबते पाया, उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए तुरंत पानी में छलांग लगा दी।

अस्पताल में भर्ती, समय पर मिली मदद

तैराकों ने कड़ी मशक्कत के बाद बदहवास हालत में छात्रा को पानी से बाहर निकाला। तब तक उसकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी। पुलिस की गाड़ी मौके पर तैयार थी और उसे बिना देरी किए इलाज के लिए लता मंगेशकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगर नागपुर पुलिस सीसीटीवी फुटेज से लोकेशन ट्रैक करने में थोड़ी भी देरी करती या फिर मौके पर वे तैराक मौजूद न होते, तो एक मासूम जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो सकती थी।

डीआईजी ने जांबाज टीम को किया सम्मानित

इस त्वरित कार्रवाई और बहादुरी की मिसाल की हर तरफ तारीफ हो रही है। डीआईजी विनीता साहू ने खुद पुलिस टीम और शार्क एक्वाटिक क्लब के सभी जांबाज तैराकों को अपने कार्यालय बुलाकर प्रशंसा पत्र और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि मानसिक तनाव में अपनों का साथ और समाज की सतर्कता किसी की जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा बन सकती है।

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