Nagpur Hydraulic Survey: नागपुर शहर में जल निकासी की समस्याओं के समाधान के लिए प्रस्तावित 5 करोड़ रुपये के हाइड्रोलिक सर्वे का निर्णय अधिकारियों की अनुपस्थिति और देरी के कारण अगली स्थायी समिति की बैठक तक के लिए टाल दिया गया।
इसके अलावा मरार टोली में पानी की पाइपलाइन बिछाते समय सौवर लाइन तोड़कर भारी लापरवाही बरतने वाले तत्कालीन अधिकारियों और इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी ने दी।
उन्होंने कहा कि शहर के लिए स्ट्राम वाटर ड्रेनेज सिस्टम के एक विस्तृत हाइड्रोलिक सर्वे कराने की योजना है, जिस पर बड़ी रकम (लगभग 5 करोड़ रुपये) खर्च होने का अनुमान है। इस सर्वे में तकनीकी विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम काम करेगी जिनकी नियुक्ति और वेतन राज्य सरकार के जीआर (GR) के दिशानिर्देशों के अनुसार तय करके डीपीआर तैयार किया जाना है।
इसके बाद आरएफपी (RFP) निकाली जाएगी जिसमें आईटी (IT) और अन्य संबंधित लोग हिस्सा लेंगे। हालांकि लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत आने वाले इस महत्वपूर्ण विषय पर आज चर्चा नहीं हो सकी।
मुख्य अभियंता कोर्ट में व्यस्त और अधीक्षक अभियंता के देरी से पहुंचने के चलते इस प्रस्ताव को आज वापस ले लिया गया है और इसे अगली स्थायी समिति की बैठक में रखा जाएगा।
बैठक में यह बात भी उठी कि यह सर्वे शहर के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसे 2-3 साल पहले बाढ़ के समय ही किया जाना चाहिए था लेकिन 'देर आए दुरुस्त आए' की तर्ज पर अब इसे किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया गया है। बैठक में स्पष्ट किया गया कि काम करते समय टूट-फूट होना संभव है और कोई जानबूझकर ऐसा नहीं करता लेकिन नुकसान होने के बाद उसे ठीक न करना एक बड़ा दोष है।
तत्कालीन जेई (JE) और डीई (DE) ने अपने सामने हुई इस टूट-फूट पर कोई ध्यान नहीं दिया जो कि उनकी सीधे तौर पर लापरवाही है।
इस मामले में निर्देश दिए गए है कि वाटर वर्क्स का काम देखने वाले संबंधित लोगों और अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए।
इन सभी को अपना स्पष्टीकरण देने के लिए शुक्रवार को बुलाया गया है। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी है कि शहर को मनमाने ढंग से खोदने और एक ही काम को बार-बार करने की प्रवृत्ति को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शुक्रवार को स्पष्टीकरण मिलने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
चर्चा के दौरान एक घोर लापरवाही का मामला भी सामने आया। 2-3 साल पहले मराल टोली क्षेत्र में पानी की पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा था जिस दौरान एक सीवर लाइन फूट गई थी।
संबंधित लोगों ने उस समय सीवर लाइन को ठीक नहीं किया और उसे वैसे ही टूटा हुआ छोड़ दिया। हाल ही में जब उस क्षेत्र में सीवर निकासी से जुड़ी नई समस्याएं उत्पन्न हुई और पीछे जाकर एक-एक चैंबर की जांच की गई तब इस टूटी और बंद पड़ी सीवर लाइन का खुलासा हुआ।