Uddhav Thackeray on Nari Shakti Vandan Adhiniyam: संसद के गलियारों से लेकर राज्यों की विधानसभाओं तक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच, शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है। महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन और विरोध को लेकर लग रही अटकलों पर विराम लगाते हुए ठाकरे ने इस ऐतिहासिक कदम का पूर्ण समर्थन किया है। हालांकि, उनका यह समर्थन बिना किसी शर्त के नहीं है। राज्यसभा सांसद संजय राउत के माध्यम से सामने आए उनके बयान में न केवल विधेयक का स्वागत किया गया है, बल्कि केंद्र सरकार की मंशा और इसे लागू करने की समयसीमा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
उद्धव ठाकरे का तर्क है कि महिला आरक्षण विधेयक का मुद्दा अब केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे धरातल पर उतारने का समय आ गया है। उन्होंने याद दिलाया कि यह विधेयक 2023 में ही संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित किया जा चुका है, इसलिए इसे भविष्य की तारीखों (जैसे 2029) पर टालने के बजाय 'तत्काल' प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। शिवसेना (UBT) का मानना है कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो जनगणना और परिसीमन जैसे तकनीकी पेच फंसाकर इसे और अधिक विलंबित करना देश की आधी आबादी के साथ अन्याय होगा।
उद्धव ठाकरे ने इस विधेयक से जुड़े सबसे विवादास्पद पहलू यानी 'परिसीमन' (Delimitation) पर अस्थायी तौर पर विराम लगाने की मांग की है। उनके अनुसार, सीटों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को आरक्षण से जोड़ना दक्षिण भारतीय राज्यों और क्षेत्रीय संतुलन के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। ठाकरे ने चिंता व्यक्त की है कि परिसीमन के नाम पर निर्वाचन क्षेत्रों का जो विभाजन प्रस्तावित है, वह कहीं राजनीतिक लाभ के लिए तो नहीं किया जा रहा? उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यापक राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए इस विषय पर जल्दबाजी के बजाय गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
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संजय राउत के मुताबिक, उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि महिला आरक्षण उनके लिए किसी एक दल के राजनीतिक भविष्य या सीटों के गणित का विषय नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर देश के लोकतांत्रिक भविष्य से जुड़ा मामला है। ठाकरे ने केंद्र सरकार को नसीहत दी है कि इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार की 'साजिश' या 'चुनावी पैंतरेबाजी' का इतिहास गवाह बनेगा। उन्होंने आह्वान किया कि सभी दलों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें महिलाओं की भागीदारी बिना किसी भविष्य के डर के सुनिश्चित हो सके।
उद्धव ठाकरे के इस रुख ने महा विकास अघाड़ी (MVA) और इंडिया (I.N.D.I.A.) गठबंधन की लाइन को और मजबूती दी है। जहाँ एक तरफ वे आरक्षण के पक्ष में खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ वे बीजेपी सरकार को इस मुद्दे पर 'क्रेडिट' लेने और इसे अपनी शर्तों पर थोपने से रोकना चाहते हैं। आने वाले समय में शिवसेना (UBT) संसद के भीतर और बाहर परिसीमन के बिना आरक्षण लागू करने के लिए दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या केंद्र सरकार विपक्ष की इन मांगों पर ध्यान देती है या परिसीमन की अपनी मूल योजना पर टिकी रहती है।