शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

'लोकतंत्र की हत्या की साजिश!' चुनाव आयोग पर भड़के उद्धव ठाकरे; स्याही और अव्यवस्था को लेकर दागे तीखे सवाल

Uddhav Thackeray: शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे ने महानगरपालिका चुनावों में भारी अव्यवस्था का आरोप लगाया है। उन्होंने अमिट स्याही और मतदान केंद्रों की शिकायतों को लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बताया।

आकाश मसने

Uddhav Thackeray Attack Election Commission: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में चल रहे महानगर पालिका चुनावों में जिस तरह की अव्यवस्था देखने को मिल रही है, वैसी उन्होंने आज से पहले कभी नहीं देखी।

स्याही और मतदान की शुचिता पर सवाल

उद्धव ठाकरे ने मतदाताओं के हाथों पर लगाई जाने वाली स्याही को लेकर मिल रही शिकायतों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि मतदान के बाद मतदाताओं की उंगलियों पर स्याही लगाई जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें व्यक्तिगत तौर पर स्याही से संबंधित ऐसी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं जो एक पारदर्शी और स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं कही जा सकतीं। ठाकरे के अनुसार, लोकतंत्र में ऐसी शिकायतों का अंबार लगना व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।

अव्यवस्था की खुली कलई: मंत्री को भी नहीं मिला पोलिंग बूथ

चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए ठाकरे ने एक चौंकाने वाला उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है कि मतदान के दौरान एक मंत्री तक को अपना पोलिंग बूथ खोजने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने सवाल किया कि यदि एक मंत्री को इतनी जद्दोजहद करनी पड़ रही है, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी? ठाकरे का दावा है कि इस पूरी स्थिति ने चुनाव आयोग द्वारा बरती गई भारी अव्यवस्था और कोताही की कलई खोलकर रख दी है। बता दें कि मंत्री गणेश नाईक को अपना मतदान केंद्र खोजने के लिए घंटे भर मशक्कत करनी पड़ी।

'लोकतंत्र की हत्या की साजिश'

उद्धव ठाकरे यहीं नहीं रुके; उन्होंने आयोग के प्रबंधन को 'लोकतंत्र की हत्या की साजिश' करार दिया। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य जताया कि कई वर्षों के लंबे इंतजार के बाद महानगर पालिका के चुनाव हो रहे हैं, इसके बावजूद आयोग इतनी बड़ी लापरवाही कैसे बरत सकता है? उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि आखिर चुनाव आयोग क्या कर रहा है? इस आयोग में काम करने वाले अधिकारी किस बात का वेतन ले रहे हैं?

जनता का सेवक है आयोग, राजा नहीं

अपने कड़े रुख को जारी रखते हुए ठाकरे ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग और उसके अधिकारी जनता के सेवक हैं, न कि राजा। उन्होंने मांग की है कि चुनावों में बरती जा रही इस गंभीर कोताही और लापरवाही को ध्यान में रखते हुए संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह की अव्यवस्था किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं की जा सकती क्योंकि यह सीधे तौर पर जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ है।

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