उद्धव ठाकरे व RSS प्रमुख मोहन भागवत सोर्स: सोशल मीडिया
मुंबई

विदेशों में ज्ञान और देश में ध्रुवीकरण? उद्धव ठाकरे गुट का RSS प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा हमला

Shiv Sena UBT On Mohan Bhagwat: उद्धव ठाकरे की पार्टी ने मोहन भागवत के न्यूयॉर्क भाषण पर सवाल उठाए हैं। ठाकरे ने कहा कि संघ को 'वसुधैव कुटुंबकम' का संदेश पहले भारत में लागू करना चाहिए।

आकाश मसने

Shiv Sena UBT Targets RSS Chief Mohan Bhagwat: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के हालिया अमेरिकी दौरे और उनके बयानों को लेकर तीखा हमला बोला है। उद्धव ठाकरे की पार्टी के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा गया कि यदि संघ नेतृत्व को एक मानवता के अपने वैश्विक संदेश को विदेशों में विश्वसनीयता दिलानी है, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए जाने वाले सहिष्णुता के सिद्धांतों को पहले भारत के घरेलू सामाजिक-राजनीतिक माहौल में लागू करना होगा।

न्यूयॉर्क में क्या बाेले मोहन भागवत?

न्यूयॉर्क में दिए अपने भाषण में RSS चीफ मोहन भागवत ने 'वसुधैव कुटुंबकम' का आह्वान करते हुए कहा था कि यदि कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह बिल्कुल भी हिंदू नहीं है।

शिवसेना यूबीटी का RSS चीफ पर तीखा हमला

सामना ने RSS चीफ के बयान पर तंज कसते हुए इसे पश्चिमी लोकतांत्रिक मानदंडों और मानवाधिकार ढांचों के अनुरूप एक सुनियोजित प्रयास करार दिया। संपादकीय में दावा किया गया कि भागवत की विदेशों में इस्तेमाल की जाने वाली संयमित भाषा और भारत के जमीनी हालात में जमीन-आसमान का अंतर है।

उद्धव ठाकरे गुट ने केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों में भाजपा के नेताओं पर अल्पसंख्यक समुदायों के व्यवस्थित बहिष्कार का माहौल बनाने का आरोप लगाया। दावा किया कि उनके कार्य हिंदू-मुस्लिम सह-अस्तित्व पर भागवत के सार्वजनिक रुख के सीधे विपरीत हैं।

'खड़गे के संबोधन के बाद भाजपा ने कराया शुद्धिकरण'

सामना के संपादकीय में उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सार्वजनिक संबोधन के बाद स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित एक कथित शुद्धिकरण समारोह का हवाला दिया गया और इसे राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित एक स्पष्ट रूप से ध्रुवीकृत घरेलू वातावरण के सबूत के रूप में बताया गया।

संपादकीय में संघ के सेलेक्टिव वैश्विक रुख पर सवाल उठाते हुए गाजा जैसे मानवीय संकटों पर उसकी चुप्पी की आलोचना की गई। ठाकरे गुट का आरोप है कि आरएसएस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों के बजाय भूराजनीतिक सहूलियत के हिसाब से रुख अपनाता है।

राम मंदिर मामले से ध्यान हटाने का आरोप

अमेरिकी दौरे के दौरान प्रस्तुत वैचारिक आख्यानों पर निशाना साधते हुए, संपादकीय में आरोप लगाया गया कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने घरेलू शासन और वित्तीय जवाबदेही से संबंधित असहज सवालों से बचने के लिए जानबूझकर भगवान राम से अपना ध्यान हटा लिया।

राम मंदिर आंदोलन की राजनीतिक उपयोगिता भाजपा के लिए खत्म

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन की राजनीतिक उपयोगिता सत्ताधारी भाजपा के लिए समाप्त हो चुकी है और उसने संघ के प्रभाव क्षेत्र से जुड़े समर्थकों पर अयोध्या मंदिर परियोजना से संबंधित वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया।

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि अमेरिका में हिंदू समुदाय ने अयोध्या में लूटे गए राम मंदिर के निर्माण के लिए भारी दान दिया था। न तो प्रधानमंत्री मोदी और न ही सरसंघचालक ने इस लूट पर कोई टिप्पणी की और कहा गया कि भागवत "भगवान राम के बजाय कृष्ण के विचारों के बारे में बोलकर अमेरिकी धरती पर जवाबदेही से बच गए।

मोदी पहुंचे ताशकंद तो भागवत अमेरिका की यात्रा पर

उद्धव ठाकरे की पार्टी ने विदेशों में हो रहे राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच समानता पर जोर देते हुए कहा कि जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने के लिए ताशकंद में उच्च स्तरीय वार्ता में भाग लिया।

वहीं आरएसएस शताब्दी कार्यक्रम के तहत आयोजित भगवत की अमेरिकी यात्रा ने सक्रिय प्रदर्शनों, राजनीतिक विरोध और अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी और घरेलू वास्तविकता के बीच के अंतर को लेकर गहन जांच को जन्म दिया।

भगवद् गीता के मूल सिद्धांतों का हवाला देते हुए संपादकीय में कहा गया है कि सच्ची आध्यात्मिक सत्ता के लिए सामाजिक विभाजन या राजनीतिक दिखावे के बजाय निस्वार्थता, समभाव और अहंकार का उन्मूलन आवश्यक है, और आरएसएस नेतृत्व से आग्रह किया गया है कि वह अपने वैश्विक उपदेशों को देश में सार्थक कार्यों से मेल खाए।

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