मानसिक स्वास्थ्य, देवेंद्र फडणवीस,(सोर्स: सोशल मीडिया)  
मुंबई

5 साल के एमओयू से बदलेगी तस्वीर, नागपुर-वर्धा में मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस; 'उड़ान' परियोजना का भी विस्तार

Mumbai Udaan Project: महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर और वर्धा में ‘उड़ान’ परियोजना का विस्तार कर ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने का निर्णय लिया है।

अंकिता पटेल

Mumbai Mental Health Services: मुंबई में राज्य के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नागपुर और वर्धा जिले में 'उड़ान' परियोजना को विस्तार देते हुए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वास्थ्य विभाग और दो स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच पांच वर्षों के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को मंजूरी दी है। राज्य सरकार के निर्णयानुसार ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्था, सौसर (मध्य प्रदेश) और अन्यथा फाउंडेशन के सहयोग से जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। यह समझौता 1 अगस्त, 2026 से 31 जुलाई, 2031 तक प्रभावी रहेगा।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को सरकार का बढ़ावा

स्वास्थ्य विभाग ने इस समझौते के लिए स्वास्थ्य सेवा निदेशक को अधिकृत किया है। यह पूरी तरह गैर-वित्तीय प्रकृति का होने के कारण राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। राज्य में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह निर्णय बेहद अहम माना जा रहा है।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य व तंत्रिका विज्ञान संस्थान के सर्वेक्षण के अनुसार देश में लगभग 10 से 14 प्रतिशत वयस्क किसी न किसी मानसिक विकार से प्रभावित हैं। राज्य की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए अनुमान है कि लगभग 1.2 से 1.8 करोड़ नागरिक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए 'उड़ान' परियोजना का विस्तार किया जा रहा है।

योजना में युवा समूह की भागीदारी बढ़ाई जाएगी

इस परियोजना के तहत ग्रामीण स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे, इसमें ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों और युवा समूहों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके तहत मानव संसाधन प्रशिक्षण, मातृ मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम और हल्के व मध्यम स्तर के मानसिक रोगियों के लिए मनोचिकित्सा तथा परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

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