मुंबई: सीएम उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) के विधान मंडल के शीत सत्र (Winter Assembly session) में भाग लेने पर सस्पेंस (Suspense) बना हुआ है। मंगलवार को विधान मंडल के शीत सत्र की पूर्व संध्या पर आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी (Tea Party) में सीएम ठाकरे शामिल नहीं हुए। वहीं उन्होंने कैबिनेट की बैठक में भी वीडियो कांफ्रेसिंग (Video Conferencing) के जरिए भाग लिया। ऐसे में अब इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या मुख्यमंत्री ठाकरे, बुधवार से शुरू हो रहे शीत सत्र में भाग लेंगे। सीएम ठाकरे का हाल ही में रीढ़ का ऑपरेशन हुआ है, जिसके बाद वे स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं।
हालांकि कुछ दिनों पूर्व उन्होंने अचानक विधान भवन जाकर सबको चौका दिया था। चाय पार्टी में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, कांग्रेस विधायक दल के नेता और राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात, कैबिनेट मंत्री अशोक चव्हाण, जयन्त पाटिल, सुभाष देसाई, एकनाथ शिंदे, अनिल परब और आदित्य ठाकरे समेत कई मंत्री समेत विधायक मौजूद रहे।
प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित चाय पार्टी का बहिष्कार किया। नेता विपक्ष देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि यह सरकार किसी भी मुद्दे पर संवेदनशील नहीं है। इस सरकार ने जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया है। राज्य में कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इसलिए हम सरकार की चाय पार्टी का बहिष्कार कर रहे हैं।
शीत सत्र से पहले हुई कैबिनेट बैठक में महाराष्ट्र आघाडी सरकार के मंत्रियों ने विपक्ष का सामना करने की रणनीति पर मंथन किया। इस बैठक में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए भाग लिया। सूत्रों के मुताबिक़, बैठक में विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के अलावा विभिन्न मुद्दों पर चर्चा, अहम प्रस्तावों और विधेयकों को निपटाने की रणनीति तैयार की गई।
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा कि हम शीत सत्र के दौरान विपक्ष का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा घोटाले की गंभीरता से जांच कर रही है। वहीं ओबीसी आरक्षण को बचाने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत हैं। अजीत पवार ने कहा कि बीजेपी के 12 विधायकों का निलंबन सदन के नियमों के तहत किया गया है। ऐसे में इस पर सवाल उठाना सही नहीं है।