मुंबई सोलार नाव (सोर्स: गूगल जेमिनी)
मुंबई

महाराष्ट्र में जल परिवहन को बढ़ावा: मुंबई-अलीबाग और सिंधुदुर्ग के बीच दौड़ेंगी आधुनिक सौर ऊर्जा नावें

Solar Powered Boats Mumbai Alibaug Sindhudurg: महाराष्ट्र सरकार द्वारा जलमार्गों पर आधुनिक सौर ऊर्जा आधारित नौकाओं को संचालित करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। आइए जानते हैं इसके बारे में...

वेदांत जोशी

Solar Powered Boats Mumbai Alibaug Sindhudurg: महाराष्ट्र में जल परिवहन को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार अब राज्य में आधुनिक सौर ऊर्जा से चलने वाली नावों के संचालन को बढ़ावा देने जा रही है।

इसके तहत मुंबई-अलीबाग से लेकर सिंधुदुर्ग तक के विभिन्न जलमार्गों पर इन आधुनिक नावों को चलाने की संभावनाओं की तलाश शुरू कर दी गई है। इस पहल से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होगी और यात्रियों को एक बेहतर तथा आधुनिक सफर का अनुभव मिलेगा।

राजस्व बढ़ाने और प्रदूषण घटाने पर ज़ोर

मत्स्य व्यवसाय व बंदरगाह मंत्री नितेश राणे ने महाराष्ट्र समुद्री मंडल और बंदरगाह विभाग को आधुनिक नौकाओं के जरिए जल परिवहन का विस्तार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही विभाग को राजस्व बढ़ाने के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। वर्तमान जलमार्गों का बेहतर उपयोग करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस कदम से न सिर्फ ईंधन का खर्च बचेगा बल्कि प्रदूषण घटाने में भी बड़ी मदद मिलेगी।

प्रस्तुतीकरण और नए रूट्स की योजना

हाल ही में हुई एक बैठक में 'नावाल्ट बोट्स' कंपनी की ओर से आधुनिक सोलर तकनीक पर आधारित नावों का एक प्रेजेंटेशन दिया गया। बैठक में विभिन्न रूट्स की योजनाओं पर चर्चा की गई। गेटवे ऑफ इंडिया से अलीबाग-मांडवा मार्ग के लिए 20 यात्रियों की क्षमता वाली आधुनिक नाव चलाने पर विचार किया जा रहा है। मुंबई से सिंधुदुर्ग जलमार्ग पर भी यात्रियों के लिए आधुनिक और हाई-टेक नौकाएं उपलब्ध कराने की योजना है। वर्सोवा-मढ़ रो-रो सेवा मार्ग के लिए 49 यात्रियों की क्षमता वाली एक आधुनिक स्पीड बोट चलाने पर चर्चा की गई है।

महाराष्ट्र सरकार का सौर ऊर्जा संचालित नौकाओं को बढ़ावा देने का यह निर्णय राज्य के जल परिवहन क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। मुंबई, अलीबाग और सिंधुदुर्ग जैसे प्रमुख तटीय मार्गों पर इन आधुनिक सोलर नावों के चलने से न केवल यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का विकल्प मिलेगा, बल्कि तटीय पर्यटन को भी नया जीवन मिलेगा।

पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम होने से कार्बन उत्सर्जन घटेगा, जिससे कोंकण के संवेदनशील समुद्री पर्यावरण की रक्षा होगी। साथ ही, यह परियोजना राज्य सरकार के राजस्व को बढ़ाने और हरित विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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