सावरकर सदन (सोर्स: फाइल फोटो) 
मुंबई

जिन्ना हाउस को सम्मान तो सावरकर सदन को क्यों नहीं? दादर में बिल्डर लॉबी के खिलाफ हिंदू संगठनों का हल्लाबोल

Hindu Janjagruti Samiti: मुंबई स्थित सावरकर सदन को ढहाने के प्रस्ताव पर भड़की हिंदू जनजागृति समिति। जिन्ना हाउस से तुलना कर सरकार पर साधा निशाना। सावरकर के निवास को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग तेज।

सूर्यप्रकाश मिश्र

Savarkar Sadan Heritage Status: देश के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं हिंदुत्व विचारक रहे विनायक दामोदर सावरक के दादर स्थित 'सावरकर सदन' इमारत के सरंक्षण की मांग को लेकर राजनीति गरमा गई है। हिंदू जनजागृति समिति (एचजेएस) के साथ अन्य दक्षिणपंथी संगठनों ने हिंदुत्व विचारक वी. डी. सावरकर के मुंबई स्थित आवास 'सावरकर सदन' के वाणिज्यिक पुनर्विकास के लिए कथित प्रस्तावित ढहाने के विरोध में शुक्रवार को प्रदर्शन किया।

संपत्ति का हो अधिग्रहण

रत्नागिरि में आयोजित आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि राज्य या केंद्र सरकार उस संपत्ति का तत्काल अधिग्रहण करे, जहां सावरकर 1938 से 1966 तक रहे थे। इसे 'राष्ट्रीय स्मारक' घोषित करने की मांग करते हुए कहा गया कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के मुंबई स्थित जिन्ना हाउस को हेरिटेज का दर्जा दिया जा सकता है,तो देश के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर के निवास को संरक्षित किया जाना चाहिए।

सावरकर सदन पर बिल्डर लॉबी की नजर

महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के लिए एचजेएस के प्रदेश समन्वयक सुनील घनवत ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में सावरकर सदन के प्रस्तावित पुनर्विकास की कड़ी निंदा की। घनवत ने कहा, ''यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वतंत्र भारत में मुंबई स्थित 'जिन्ना हाउस' पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि अखंड भारत के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले वीर सावरकर के निवास स्थान पर बिल्डर लॉबी द्वारा ढहाये जाने का खतरा मंडरा रहा है।

समिति ने आरोप लगाया कि मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने 2010 में ही इस ढांचे को विरासत सूची में शामिल करने की सिफारिश की थी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार पिछले 15 वर्षों में इस पर कोई अंतिम निर्णय लेने में विफल रही है। राज्य में सावरकर की विचारधारा वाली बीजेपी सरकार होने के बावजूद सावरकर सदन पर खतरा मंडरा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने महायुति सरकार से इस स्थल को एक भव्य संग्रहालय, डिजिटल पुस्तकालय और एक शोध केंद्र में बदलने का आग्रह किया, जहां सावरकर की मूल पांडुलिपियों को प्रदर्शित किया जा सके। इस आंदोलन में भाजपा, विश्व हिंदू परिषद, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सनातन संस्था के सदस्यों ने भाग लिया।

एचजेएस की चेतावनी

हिंदू जनजागृति समिति (एचजेएस) ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस विरासत संपत्ति को सुरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाने में विफल रहती है, तो पूरे महाराष्ट्र में राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा।

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