Sanjay Shirsat Bachchu Kadu Meets Abhijit Dipke: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में इन दिनों एक नई हलचल मची हुई है, जिसने महायुति सरकार के भीतर के समीकरणों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह हलचल किसी बड़े चुनाव या नीतिगत फैसले को लेकर नहीं, बल्कि एक मुलाकात को लेकर है।
शिवसेना शिंदे गुट के कद्दावर नेता और मंत्री संजय शिरसाट और बच्चू कडू ने हाल ही में अभिजीत दिपके के परिवार से मुलाकात की, जिसके बाद से राज्य की राजनीति का पारा चढ़ गया है।
अभिजीत दिपके CJP के संस्थापक हैं और हाल ही में वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर किए गए अपने बड़े आंदोलन के कारण चर्चा में आए थे। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर करीब एक महीने तक कड़ा विरोध प्रदर्शन किया था। दिलचस्प बात यह है कि इस आंदोलन के तीव्र होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस बड़ी जीत के बाद जब दिपके अपने मूल निवास छत्रपती संभाजीनगर लौटे, तो उनसे मिलने के लिए सत्ता पक्ष के दो बड़े नेताओं का पहुंचना चर्चा का विषय बन गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गुपचुप मुलाकात से उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे काफी नाराज बताए जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा आम है कि शिंदे ने संजय शिरसाट और बच्चू कडू से इस बारे में जवाब-तलबी की है। शिंदे का सवाल सीधा था जब महायुति की इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक भूमिका तय नहीं हुई थी, तो आप दोनों व्यक्तिगत रूप से दिपके से मिलने क्यों गए? उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में बिना किसी चर्चा के कदम उठाना गठबंधन की एकजुटता के लिए सही नहीं है।
इस पूरी खींचतान पर विपक्षी नेता रोहित पवार ने चुटकी लेने में देरी नहीं की। रोहित पवार ने इस मुलाकात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कहना मुश्किल है कि ये नेता अपनी मर्जी से वहां गए थे या फिर एकनाथ शिंदे ने ही उन्हें भेजकर बाद में नाराजगी का नाटक किया है।
पवार ने आगे तंज कसते हुए कहा, महायुति चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, अभिजीत दिपके उनके विचारों के साथ कभी काम नहीं करेंगे। वे न तो भाजपा में जाएंगे और न ही महायुति के किसी अन्य दल में।
यह भी पढ़ें: होटलों का लाइसेंस सीधे सस्पेंड क्यों? कड़क FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने खुद बताया इसके पीछे का कानून और मंशा
यह घटना दर्शाती है कि महायुति के भीतर समन्वय की भारी कमी है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष के नेता अपने स्तर पर नए समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की नाराजगी ने यह साफ कर दिया है कि गठबंधन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। अभिजीत दिपके जैसे युवा नेता की बढ़ती लोकप्रियता ने सत्ता पक्ष को जहां असमंजस में डाल दिया है, वहीं विपक्ष इसे महायुति की कमजोरी के रूप में भुनाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि संजय शिरसाट और बच्चू कडू की यह 'निजी' मुलाकात महायुति के भविष्य पर क्या असर डालती है।