संजय राउत (सोर्स: डिजाइन फाेटो) 
मुंबई

'जहां ठाकरे, वहां शिवसेना': संजय राउत ने शिंदे गुट को बताया गद्दार सेना, दिल्ली में फिर गरजी ठाकरे की तोप

Sanjay Raut Target Eknath Shinde: संजय राउत ने शिंदे गुट पर तीखा हमला साधा है। उन्होंने कहा, यह शिंदे-बिंदे की शिवसेना नहीं, जहाँ ठाकरे वहाँ शिवसेना है। राउत ने शिंदेसेना को गद्दार सेना भी बताया।

गोरक्ष पोफली

Sanjay Raut Statement Jahan Thackeray Wahan Shiv Sena: महाराष्ट्र की सियासत में जुबानी जंग अब अपने चरम पर पहुंच गई है। शिवसेना ठाकरे गुट के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक बार फिर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए राउत ने दो टूक लहजे में कहा कि असली शिवसेना की पहचान केवल ठाकरे नाम से है और शिंदे गुट को उन्होंने गद्दार शिवसेना करार दिया है।

शिंदे-बिंदे की शिवसेना नहीं, यह ठाकरे की सेना है

संजय राउत का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उनसे मूल शिवसेना को लेकर सवाल पूछा गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, यह कोई शिंदे-बिंदे की शिवसेना नहीं है। जहां ठाकरे हैं, वहीं शिवसेना है। राउत ने शिंदे गुट के दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें गद्दार शिवसेना की संज्ञा दी। उनका तर्क था कि शिवसेना का अस्तित्व और उसकी आत्मा ठाकरे परिवार से जुड़ी है, जिसे कोई और नहीं छीन सकता।

बीजेपी का उदाहरण देकर कसा तंज

अपनी बात को पुख्ता करने के लिए संजय राउत ने एक रोचक उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर आज कोई उठकर यह दावा करने लगे कि वही मूल बीजेपी है, तो क्या उसे मान लिया जाएगा? उन्होंने सवाल उठाया कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना आखिर कब से मूल शिवसेना हो गई? राउत ने स्पष्ट किया कि असली लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी पर सुनवाई चल रही है, जो यह तय करेगी कि कानूनी तौर पर पार्टी किसकी है।

हताशा या रणनीतिक हमला?

पिछले कुछ दिनों से संजय राउत का बेहद आक्रामक और कभी-कभी अमर्यादित अवतार देखने को मिल रहा है। ऑपरेशन टाइगर के बीच जिस तरह से उनके गुट के सांसदों के टूटने की खबरें आ रही हैं, उसे देखते हुए राउत का यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की एक कोशिश माना जा रहा है। वे बार-बार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि शिवसेना का मतलब सिर्फ उद्धव ठाकरे है।

संजय राउत के इन तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि वे शिंदे गुट को किसी भी कीमत पर राजनीतिक मान्यता देने को तैयार नहीं हैं। उनके लिए शिंदे गुट केवल एक गद्दार गुट है, जबकि असली विरासत ठाकरे परिवार के पास है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली की इस सियासी जंग का असर महाराष्ट्र की जमीन पर क्या होता है और सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस ऊंट को किस करवट बिठाता है।

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