उद्धव ठाकरे और नरेंद्र मोदी (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

भ्रष्ट मंत्रियों का समर्थन करके मोदी कर रहे हैं देशद्रोह! 'सामना' के संपादकीय में केंद्र सरकार पर तीखा हमला

Saamana Editorial PM Modi Attack: ठाकरे गुट के अखबार सामना के संपादकीय में पीएम मोदी पर भ्रष्ट मंत्रियों का समर्थन करने और देशद्रोही नीतियां चलाने का आरोप लगाया गया है।

अनिल सिंह

Uddhav Thackeray Attack PM Modi Saamana: शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र 'सामना' के ताजा संपादकीय में केंद्र की मोदी सरकार पर अब तक का सबसे आक्रामक और तीखा राजनीतिक हमला बोला गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आंदोलन और देश भर में 'नीट' (NEET) परीक्षा की कथित धांधली को लेकर भड़के युवाओं के असंतोष के बीच 'सामना' ने केंद्र सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया है।

संपादकीय में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट के भ्रष्ट, अक्षम और अयोग्य मंत्रियों का बचाव करके देश के साथ विश्वासघात और 'देशद्रोह' कर रहे हैं। दिल्ली की सड़कों पर संसद भवन की ओर मार्च कर रहे लाखों युवाओं के आक्रोश को 'सामना' ने एक नई जनक्रांति की आहट बताया है।

भ्रष्ट और नाकाम मंत्रियों का बचाव कर रहे हैं पीएम

'सामना' के लेख में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के कामकाज पर सवाल उठाते हुए मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की गई है। सामना संपादकीय में लिखा गया है कि 'नीट' परीक्षा के पेपर लीक की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है।

इसके अलावा, लद्दाख में चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मणिपुर हिंसा व कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर गृह मंत्री अमित शाह, और देश की आर्थिक सुस्ती को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस्तीफे की मांग की गई है। लेख का दावा है कि विफलताओं के बावजूद इन सभी मंत्रियों का खुलकर समर्थन करना देश की जनता और लोकतंत्र के साथ सीधा छल है।

बेरोजगार युवाओं के असंतोष को बताया क्रांति की शुरुआत

संपादकीय में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी का संदर्भ देते हुए देश के युवाओं की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें कहा गया है कि मोदी सरकार के शासनकाल में देश का युवा रोजगार, सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए तरस रहा है। 'सामना' ने लिखा कि मंत्रियों के बच्चे विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जबकि देश का आम युवा सड़कों पर लाठियां खाने को मजबूर है।

दिल्ली से लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क तक आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों और नागपुर-पुणे में उठी विरोध की आवाजों को 'सामना' ने जन-विद्रोह करार दिया है। संपादकीय का निष्कर्ष निकालते हुए अंत में आक्रामक नारा दिया गया है, "तानाशाही नहीं चलेगी, मोदी-शाह चले जाओ!", जिससे राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है।

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