रोहित पवार (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

यह किसानों और संगठनों के सामूहिक संघर्ष की बड़ी जीत है, लोन माफी की शर्तें हटाने पर बोले रोहित पवार

Rohit Pawar Statement: पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर ऋण माफी योजना की कड़ी शर्तें हटाने पर रोहित पवार का बड़ा बयान। कहा- यह राज्य के किसानों और संगठनों के सामूहिक संघर्ष की बड़ी जीत है।

गोरक्ष पोफली

Maharashtra Loan Waiver Conditions Removed: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार के विधायक रोहित पवार ने शनिवार को कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर ऋण माफी योजना से जुड़ी प्रतिबंधात्मक शर्तों को समाप्त करने का निर्णय राज्य भर के किसानों, संगठनों और राजनीतिक नेताओं के सामूहिक संघर्ष की एक बड़ी जीत है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवार ने कहा कि राज्य सरकार ने 2 जून को लगभग 56 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 36,585 करोड़ रुपए की भारी ऋण माफी की घोषणा की थी। हालांकि, एनसीपी-एसपी नेता ने कहा कि यह योजना शुरू में अत्यधिक जटिल और अनुचित शर्तों से बोझिल थी।

50,000 की सीमा को बताया घोर अन्यायपूर्ण

मूल ढांचे के तहत, 35 लाख से अधिक किसान इस योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित होने के खतरे में थे। पवार ने दो प्रमुख बिंदुओं पर प्रकाश डाला, जिन्होंने व्यापक आक्रोश को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने 2019 में ऋण माफी का लाभ उठाया था, उन्हें अधिकतम केवल 50,000 रुपए की राहत दी गई। उन्होंने इस शर्त की कड़ी आलोचना करते हुए इसे घोर अन्यायपूर्ण बताया और कहा कि 2019 से किसानों को उर्वरक, बीज, श्रम और परिवहन की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों का भी सामना करना पड़ रहा है।

प्रोत्साहन सब्सिडी के कड़े नियमों पर उठाए सवाल

पवार ने दावा किया कि राज्य सरकार की प्रोत्साहन सब्सिडी के लिए पात्र होने के लिए प्रारंभिक नियम के अनुसार किसानों को 2022-23, 2023-24 और 2024-25 चक्रों में से किन्हीं दो वर्षों के लिए अपने फसल ऋण का समय पर भुगतान करना आवश्यक था। हालांकि, राज्य सरकार ने एक कठोर द्वितीयक शर्त जोड़ दी, जिसके तहत उन्हें 2025-26 और 2026-27 के लिए भी अपने फसल ऋण का भुगतान करना अनिवार्य हो गया। इसका मतलब यह हुआ कि किसानों को प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए चार वर्षों का ऋण चुकाना होगा, जिससे लाखों किसानों के वंचित रह जाने का खतरा है।

छत्रपति संभाजीनगर के एल्गर मोर्चा तक का सफर

राज्य सरकार को कार्रवाई करने के लिए मजबूर करने वाले निरंतर आंदोलनों का विस्तृत विवरण देते हुए एनसीपी-एसपी विधायक ने तीव्र प्रदर्शनों की समयरेखा प्रस्तुत की। 12 से 14 जून तक पंढरपुर में कार्यकर्ताओं और किसानों ने भूख हड़ताल की।

मंत्री गिरीश महाजन द्वारा समीक्षा बैठक का वादा किए जाने के बाद हड़ताल को अस्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया, लेकिन राज्य सरकार ने बाद में ऐसी बैठक आयोजित नहीं की। राज्य सरकार की चुप्पी के जवाब में, 29 जून को छत्रपति संभाजीनगर में हजारों किसानों ने विशाल एल्गर मोर्चा में मार्च निकाला।

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