Ramdas Athawale Demands 25 seats In UP: अपनी हाजिरजवाबी और तुकबंदी वाली कविताओं के लिए मशहूर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बिसात पर अपनी चाल चल दी है। महाराष्ट्र की राजनीति में किंगमेकर की भूमिका निभाने की चाह रखने वाली रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI-A) अब उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में अपनी किस्मत आजमाना चाहती है। आठवले ने भाजपा नेतृत्व के सामने 25 सीटों की मांग रखी है, जिसने एनडीए के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है।
रामदास आठवले की नजर उत्तर प्रदेश की उन 25 सीटों पर है जो दलित बाहुल्य हैं। ऐतिहासिक रूप से ये सीटें बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और मायावती का मजबूत किला रही हैं। आठवले का तर्क है कि चूंकि मायावती का प्रभाव धीरे-धीरे कम हो रहा है, ऐसे में वह खाली जगह को भरने के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी के पास समर्पित कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है। आठवले का मानना है कि यदि चंद्रशेखर आजाद 'रावण' जैसे युवा नेता दलित वोटों को आकर्षित कर सकते हैं, तो एनडीए के भीतर रहकर RPI (A) दलितों को भाजपा के पाले में लाने का सबसे बेहतर काम कर सकती है।
महाराष्ट्र में बीएमसी से लेकर विधानसभा तक अपना प्रभाव रखने वाले आठवले अब उत्तर प्रदेश में गठबंधन धर्म और सीटों के समीकरण का काफिया जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि आठवले अपनी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को विस्तार देना चाहते हैं। हालांकि, भाजपा के भीतर इस मांग को लेकर बहुत उत्साह नहीं है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा का मानना है कि सहयोगी दलों को सीट बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय बंद कमरे में चर्चा करनी चाहिए। हम एनडीए के अनुशासित सिपाही हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करना भी जरूरी है। यदि भाजपा हमें सम्मानजनक सीटें नहीं देती है, तो हम अकेले चुनाव लड़ने पर भी विचार कर सकते हैं।"
भले ही रामदास आठवले एनडीए सरकार में मंत्री हैं, लेकिन उनकी पार्टी का चुनावी ग्राफ उतार-चढ़ाव भरा रहा है:
यह भी पढ़ें: Devendra Fadnavis Statement: शिवाजी पर किताब विवाद, विधायक की धमकी भरी भाषा को बताया अस्वीकार्य
उत्तर प्रदेश में भाजपा पहले से ही अपना दल (एस) और निषाद पार्टी जैसे मजबूत सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग को लेकर मशक्कत कर रही है। ऐसे में आठवले की 25 सीटों की मांग ने गठबंधन के गणित को थोड़ा उलझा दिया है। क्या आठवले की यह कविता भाजपा को पसंद आएगी या फिर महाराष्ट्र का यह दिग्गज नेता यूपी की चुनावी रणभेरी अकेले बजाएगा, यह आने वाले वक्त में साफ होगा।