Raj Thackeray Vs Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र दिवस के पावन अवसर पर राज्य में मराठी अस्मिता और भाषा को लेकर सियासत गरमा गई है। एक तरफ जहां मनसे (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने गैर-मराठी भाषियों और सरकार की नरम नीति पर तीखा प्रहार किया है, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि महाराष्ट्र में रहना है तो मराठी सीखनी होगी, लेकिन इसके लिए हिंसा का सहारा कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महाराष्ट्र दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में राज ठाकरे अपने चिर-परिचित आक्रामक अंदाज में नजर आए। उन्होंने रिक्शा चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने के फैसले और उसमें दी गई ढील पर कड़ा ऐतराज जताया। राज ठाकरे ने कैबिनेट मंत्री प्रताप सरनाईक का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा, हमारे यहां के मंत्री जरा सा विरोध होते ही 3-4 महीने का समय बढ़ा देते हैं। क्या ऐसा लचीलापन गुजरात, तमिलनाडु या अन्य राज्यों में चलेगा? राज ठाकरे ने आगे कहा कि किसी की यह हिम्मत कैसे हो जाती है कि वह महाराष्ट्र में रहकर कहे कि मैं मराठी नहीं बोलूंगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि चाहे सामने वाला हिंदी में बोले या हिंदी में चिल्लाए, हमें मराठी में ही जवाब देना चाहिए और मराठी में ही अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने हिंसा के अपने तरीके का समर्थन करते हुए कहा कि भले ही दूसरों को यह तरीका पसंद न हो, लेकिन परिणाम लाने के लिए यही सही रास्ता है।
हुतात्मा चौक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज ठाकरे के बयानों का संजीदगी से जवाब दिया। फडणवीस ने कहा, यह सच है कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को स्थानीय भाषा यानी मराठी सीखनी चाहिए। लेकिन भाषाई गौरव के नाम पर हिंसा या किसी को डराना-धमकाना गलत है।
राज ठाकरे की संकीर्ण राजनीति पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र कभी भी संकीर्ण विचारधारा वाला राज्य नहीं रहा है। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा सिखाए गए महाराष्ट्र धर्म का हवाला देते हुए कहा कि हमारा राज्य प्रवासियों को बाहर निकालने या भेदभाव करने की मानसिकता नहीं रखता। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि आज मराठी भाई देश के हर कोने में जाकर वहां की संस्कृति और विकास में योगदान दे रहे हैं।
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भाषा विवाद से इतर मुख्यमंत्री फडणवीस ने अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर अन्नाभाऊ साठे की पंक्तियों को याद किया, पृथ्वी शेषनाग के मस्तक पर नहीं, बल्कि श्रमिकों की हथेलियों पर टिकी है। उन्होंने राज्य के बुनियादी ढांचे के निर्माण में पसीना बहाने वाले मजदूरों का आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने प्रसिद्ध पंक्ति दिल्लीचे ही तख्त राखितो महाराष्ट्र माझा को उद्धृत करते हुए महाराष्ट्र के नेतृत्व और प्रगतिशील भविष्य का खाका पेश किया।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सरकार ने गैर-मराठी भाषी रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा सीखना अनिवार्य कर दिया। रिक्शा यूनियनों के विरोध के बाद महाराष्ट्र सरकार ने समय-सीमा बढ़ाकर अगस्त कर दी थी, जिसे राज ठाकरे ने कायरता करार दिया।