सोनम वांगचुक और राज ठाकरे (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

जिसे राम की फिक्र नहीं उसे आंदोलन से क्या फर्क पड़ेगा, सोनम वांगचुक के समर्थन में सरकार पर भड़के राज ठाकरे

Raj Thackeray Supports Sonam Wangchuk Protest: राज ठाकरे ने भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का समर्थन करते हुए नीट गड़बड़ी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।

अनिल सिंह

Raj Thackeray On Sonam Wangchuk: देश की राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 19 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के आंदोलन को अब महाराष्ट्र से बड़ा राजनीतिक समर्थन मिला है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ बेहद तीखा मोर्चा खोला है।

59 वर्षीय सोनम वांगचुक देश में हाल ही में हुए नीट (NEET) पेपर लीक, शिक्षा घोटालों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। राज ठाकरे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक विस्तृत और बेहद आक्रामक पोस्ट साझा कर सरकार की नीतियों और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जो राम का खजाना लुटते देख चुप रहे, उन्हें आंदोलन से क्या फर्क पड़ेगा

राज ठाकरे ने अपने पोस्ट की शुरुआत में ही सरकार की संवेदनहीनता पर प्रहार करते हुए लिखा कि सोनम वांगचुक जिन महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों के लिए लड़ रहे हैं, वे पूरी तरह से जायज हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने देश के एक इतने महत्वपूर्ण आंदोलन को कुर्बान करने का मन बना लिया है। जब यह मौजूदा सरकार भगवान श्री राम के खजाने को लूटे जाते हुए मूकदर्शक बनकर चुपचाप देख सकती है, तो इसे आम नागरिकों के लोकतांत्रिक आंदोलनों और उनकी जान की क्या फिक्र होगी?"

ठाकरे ने आगे देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और मीडिया के एक बड़े हिस्से पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जो निष्पक्ष संस्थाएं थीं, उन पर अब सत्ता का कब्जा हो चुका है और चुनाव मनमाने ढंग से भारी पैसा खर्च करके कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया का एक बड़ा वर्ग अपने 'अदृश्य आका' के इशारे पर विपक्ष को बदनाम करने और सच को दबाने में लगा हुआ है, जिससे जनहित के आंदोलनों को कुचलना सरकार के लिए और आसान हो गया है।

लद्दाख के धोखे और व्यापम से लेकर NEET तक की नाकामी का जिक्र

भाजपा की राजनीतिक अवसरवादिता पर हमला बोलते हुए मनसे प्रमुख ने याद दिलाया कि साल 2018 में भाजपा ने सोनम वांगचुक को बुलाकर उनकी खूब तारीफ की थी, क्योंकि तब वे उनके लिए सुविधाजनक थे। लेकिन जब वांगचुक ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, वहां दो लोकसभा सीटें सुनिश्चित करने और स्थानीय लोगों के भूमि अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई, तो सरकार ने उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन दिए और बाद में छोड़ दिया।

नीट (NEET) परीक्षा का जिक्र करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि देश का कोई भी कोना भाजपा शासन में परीक्षा घोटालों से अछूता नहीं रहा है। मध्य प्रदेश के कुख्यात व्यापम घोटाले से लेकर आज देश के लाखों छात्रों के भविष्य को बर्बाद करने वाले नीट पेपर लीक और शिक्षक भर्ती घोटालों तक, हर जगह भ्रष्टाचार का बोलबाला है। उन्होंने कहा कि सत्ता की असीमित शक्ति ने पूरी प्रशासनिक प्रणाली को पंगु बना दिया है।

पीएम मोदी से की अपील

राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस गंभीर सामाजिक विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर तुरंत हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। उन्होंने लिखा कि नीट परीक्षा में हुई धांधली कोई आम राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के लाखों बेगुनाह छात्रों और उनके माता-पिता के आंसुओं और संघर्षों से जुड़ा एक संवेदनशील सामाजिक मामला है।

प्रधानमंत्री पर सीधा कटाक्ष करते हुए ठाकरे ने लिखा, "फिलहाल इस बात की खुशियां मनाई जा रही हैं कि आप पंडित जवाहरलाल नेहरू से कितने दिन अधिक देश के प्रधानमंत्री रहे हैं। लेकिन सच यह है कि प्रधानमंत्री पद का लंबा कार्यकाल सिर्फ एक गणितीय संख्या है, और कुछ नहीं! उस संख्या का ऐतिहासिक महत्व तभी होगा जब आप आज ऐसे राष्ट्रीय संकट के समय छात्रों के पक्ष में कोई बड़ा और कड़ा फैसला लेंगे। वरना उस संख्या का आने वाली पीढ़ी के लिए क्या फायदा, जिससे देश के युवाओं को कुछ हासिल ही न हो।" अंत में उन्होंने देश के नागरिक समाज को सोशल मीडिया के 'लाइक और शेयर' के जाल से बाहर निकलकर वास्तविक राजनीति और आंदोलनों का हिस्सा बनने की अपील की और ऐलान किया कि मनसे इस पूरी लड़ाई में सोनम वांगचुक के साथ मजबूती से खड़ी है।

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