OBC Cabinet Sub Committee Meeting Boycott Mumbai: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण के मुद्दे के बीच एक बार फिर मराठा और OBC समाज के बीच तनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को हुई OBC मंत्रिमंडलीय उपसमिति की महत्वपूर्ण बैठक से तीन मंत्रियों ने दूरी बनाई। मंत्री छगन भुजबल, गुलाबराव पाटिल और संजय राठौड़ बैठक में शामिल नहीं हुए।
बताया जा रहा है कि तीनों मंत्री OBC महामंडल के लिए पर्याप्त और उचित निधि का प्रावधान नहीं किए जाने से नाराज हैं। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि, बैठक में उनकी अनुपस्थिति के कारणों को लेकर संबंधित मंत्रियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
मराठा आरक्षण को लेकर मराठा और OBC समाज के बीच बढ़ते विवाद की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने OBC मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया है। समिति का उद्देश्य OBC समाज से जुड़े आर्थिक और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर उनके समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाना है।
भाजपा नेता और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले इस समिति के अध्यक्ष हैं। समिति में अलग-अलग विभागों के मंत्रियों को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया है।
OBC मंत्रिमंडलीय उपसमिति में अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले के अलावा छगन भुजबल, गणेश नाईक, पंकजा मुंडे, संजय राठौड़, गुलाबराव पाटिल, अतुल सावे और दत्तात्रय भरणे सदस्य हैं।
समिति के माध्यम से OBC समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों, योजनाओं और आर्थिक आवश्यकताओं पर सरकार के स्तर पर चर्चा की जानी है।
मंगलवार की बैठक से तीन मंत्रियों के अनुपस्थित रहने को OBC महामंडल के लिए निधि आवंटन से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों की मांग है कि OBC समाज से संबंधित आर्थिक और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान किया जाए।
निधि को लेकर सामने आई यह नाराजगी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब राज्य में मराठा आरक्षण और OBC आरक्षण को लेकर दोनों समुदायों के बीच राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है।
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। मराठा आरक्षण को लेकर लिए जाने वाले फैसलों का OBC समाज की ओर से भी लगातार मूल्यांकन किया जाता रहा है।
ऐसे में OBC मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक से तीन मंत्रियों की अनुपस्थिति ने सरकार के सामने OBC से जुड़े मुद्दों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार निधि आवंटन से जुड़ी मांगों पर क्या कदम उठाती है और अगली बैठक में नाराज मंत्रियों की भागीदारी होती है या नहीं।