Hit and Run Prevention Technology: नार्वे से सामने आई एक नवाचारी पहल ने सोशल मीडिया पर 'हिट एंड रन' (Hit and Run) की बढ़ती घटनाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दुनिया भर में सड़क किनारे सोने वाले बेघर लोग अक्सर रात के अंधेरे में तेज रफ्तार वाहनों का शिकार हो जाते हैं। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए नार्वे में बेघरों को 'ग्लोइंग ब्लैंकेट' (Glowing Blankets) वितरित किए गए हैं। यह विशेष कंबल अंधेरे में चमकते हैं, जिससे वाहन चालकों को दूर से ही सड़क किनारे सो रहे व्यक्ति की उपस्थिति का पता चल जाता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर 'द स्टोरी टेलर' और फेसबुक पर 'फैक्ट फ्यूल' जैसे हैंडल्स द्वारा साझा की गई इस जानकारी ने मुंबईकरों का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया है। मुंबई जैसे महानगर में, जहां हजारों लोग फुटपाथों पर रात गुजारते हैं, वहां इस तरह की तकनीक जीवन रक्षक साबित हो सकती है। पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया है, "काश ऐसा मुंबई में भी होता", जो शहर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के प्रति जनता की चिंता को दर्शाता है।
ग्लोइंग ब्लैंकेट साधारण कंबलों से अलग होते हैं। इनमें रेट्रो-रिफ्लेक्टिव (Retro-reflective) सामग्री या रेडियम जैसी पट्टियों का उपयोग किया जाता है, जो वाहन की हेडलाइट की रोशनी पड़ते ही तेजी से चमकने लगती हैं। नार्वे जैसे देशों में जहां सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी व अंधेरी होती हैं, वहां ये कंबल सड़क सुरक्षा के लिए एक वरदान की तरह हैं। यह तकनीक ठीक वैसी ही है जैसी सड़क पर काम करने वाले कर्मचारी 'रेडियम जैकेट' पहनते हैं ताकि वे ड्राइवरों को स्पष्ट दिखाई दे सकें।
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मुंबई में हिट एंड रन के मामले किसी से छिपे नहीं हैं। मानसून के दौरान या कोहरे वाली रातों में फुटपाथ पर सोने वाले लोग ड्राइवरों के लिए अदृश्य हो जाते हैं, जिससे दर्दनाक हादसे होते हैं। यदि मुंबई महानगरपालिका (BMC) या कोई गैर-सरकारी संगठन (NGO) नार्वे की तर्ज पर इन 'रिफ्लेक्टिव कंबलों' का वितरण करता है, तो हताहतों की संख्या में भारी कमी लाई जा सकती है। यह तकनीक न केवल सस्ती है, बल्कि इसे लागू करना भी बेहद आसान है।
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद मुंबई के नेटिज़न्स लगातार प्रशासन को टैग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को बुनियादी ढांचे के साथ-साथ मानवीय सुरक्षा के ऐसे छोटे लेकिन प्रभावी उपायों पर भी ध्यान देना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, "मुंबई में फुटपाथों पर रहने वालों के लिए यह कंबल किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं होंगे।" हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कंबल बांटने के साथ-साथ बेघरों के लिए रैन बसेरों (Shelter Homes) की संख्या बढ़ाना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।