Narayan Rane Birthday (डिजाइन फोटो) 
मुंबई

Narayan Rane: सीएम से केंद्रीय मंत्री तक का सफर, नारायण राणे की राजनीति, जिसने महाराष्ट्र की सत्ता हिला दी

Narayan Rane Birthday: नारायण राणे के जन्मदिन पर जानें उनके राजनीतिक सफर के वो बड़े किस्से, जिन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी। वो कैसे मुख्यमंत्री बने और आज भी राजनीति में सक्रिय हैं।

अनिल सिंह

Narayan Rane Political Career: महाराष्ट्र की राजनीति के 'दबंग' नेता और कोंकण के शेर कहे जाने वाले नारायण तातू राणे आज अपना 74वां जन्मदिन मना रहे हैं। 10 अप्रैल 1952 को जन्मे राणे का सफर मुंबई की गलियों से शुरू होकर दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक पहुँचा है। उनका राजनीतिक जीवन किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं है, जिसमें बगावत, वफादारी और सत्ता के शिखर तक पहुँचने की अद्भुत जिजीविषा दिखाई देती है।

राणे महाराष्ट्र की राजनीति के उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने शिवसेना, कांग्रेस और अब भाजपा—तीनों प्रमुख विचारधाराओं के साथ काम किया और हर जगह अपना दबदबा बनाए रखा।

शाखा प्रमुख से सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक

नारायण राणे के करियर का सबसे बड़ा मोड़ 1999 में आया। शिवसेना में एक साधारण 'शाखा प्रमुख' के रूप में शुरुआत करने वाले राणे, बालासाहेब ठाकरे के चहेते बन गए थे। जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी को पद छोड़ना पड़ा, तब बालासाहेब ने कई वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर नारायण राणे के नाम पर मुहर लगा दी। राणे महज 8 महीने के लिए मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उस छोटे से कार्यकाल में उन्होंने अपनी प्रशासनिक पकड़ का लोहा मनवा लिया था।

शिवसेना से बगावत और कांग्रेस का सफर

2005 में नारायण राणे ने शिवसेना को 'जय महाराष्ट्र' कह दिया। उद्धव ठाकरे के साथ बढ़ते मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ी और अपने साथ कई विधायकों को भी ले गए। यह शिवसेना के इतिहास का एक बड़ा झटका था। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हुए और राजस्व व उद्योग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। हालांकि, कांग्रेस में रहते हुए उनके मन में मुख्यमंत्री पद की कसक हमेशा बनी रही, जिसके चलते उन्होंने कई बार अपनी ही सरकार के खिलाफ तीखे तेवर अपनाए।

बीजेपी में दिल्ली का बढ़ा कद

2019 में अपनी पार्टी का भाजपा में विलय करने के बाद राणे का कद राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें केंद्रीय MSME मंत्री बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। वर्तमान में वे रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से लोकसभा सांसद हैं और कोंकण की राजनीति के 'अघोषित राजा' माने जाते हैं। उनके दोनों बेटे, नितेश और नीलेश राणे भी राज्य की सक्रिय राजनीति में उनके उत्तराधिकारी के रूप में अपनी जगह बना चुके हैं।

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