Upper Vaitarna Lake Dries Up: मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाली सातों झीलों के वर्तमान जलस्तर पर नजर डालें, तो कुल मिलाकर केवल 15.57 प्रतिशत पानी ही बचा हुआ है। आंकड़ों के लिहाज से सातों झीलों में अब कुल 2 लाख 25 हजार 294 करोड़ लीटर पानी उपलब्ध है। लगातार बढ़ती गर्मी और पानी के तेजी से हो रहे वाष्पीकरण को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि यह आरक्षित स्टॉक मुंबई शहर की 40 से 45 दिनों की आवश्यकता को ही मुश्किल से पूरा कर पाएगा। ऐसी स्थिति में यदि जून महीने के भीतर मुंबई के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी और नियमित मानसूनी बारिश नहीं होती है, तो मुंबई को इतिहास की सबसे गंभीर पानी की किल्लत से जूझना पड़ सकता है।
अपर वैतरणा के पूरी तरह सूखने से बीएमसी के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, क्योंकि अब पूरे मुंबई की प्यास बुझाने का अतिरिक्त भार शेष बची छह झीलों के कंधों पर आ गया है। इन छह झीलों में से भी 'तानसा झील' की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है, जहां जलस्तर गिरकर मात्र 10 प्रतिशत पर सिमट गया है। यदि यही स्थिति रही तो तानसा से भी किसी भी समय जल निकासी को रोकना पड़ सकता है। वहीं, संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (SGNP) में स्थित तुलसी और विहार झीलें आकार में इतनी छोटी हैं कि वे प्रतिदिन केवल 15 से 18 मिलियन लीटर पानी ही दे पाती हैं, जो मुंबई की विशाल दैनिक मांग के आगे ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
इस कठिन और अभूतपूर्व परिस्थिति में मुंबईकरों के लिए पानी की सप्लाई का मुख्य दारोमदार अब राज्य सरकार के नियंत्रण वाली 'भातसा झील' और बीएमसी के स्वामित्व वाली 'मोडक सागर' व 'मध्य वैतरणा' झीलों पर टिक गया है। राहत की बात यह है कि इन सबमें सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाली भातसा झील में वर्तमान में 1 लाख 70 करोड़ लीटर पानी का भंडारण मौजूद है। इस संकट काल में मुंबई शहर को पानी की कमी से बचाने के लिए भातसा झील से प्रतिदिन लगभग 17 करोड़ लीटर पानी रिलीज किया जा रहा है।
मौसम विभाग ने हालांकि जून के पहले सप्ताह में मानसून के आगमन की उम्मीद जताई है, लेकिन यदि मानसूनी हवाओं की गति धीमी पड़ती है या बारिश में थोड़ी भी देरी होती है, तो प्रशासन के लिए पानी का संतुलन बनाए रखना नामुमकिन हो जाएगा। पूरी तरह से केवल भातसा और मोडक सागर नदियों के सीमित प्रवाह पर निर्भर रहकर आधी से ज्यादा मुंबई को पानी पहुंचाना नगर निगम के लिए तकनीकी और प्रशासनिक रूप से सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
बीएमसी जल विभाग के अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नागरिकों से पानी का बेहद संयम और किफायती तरीके से उपयोग करने की अपील की है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए शहर के कई हिस्सों में पानी के दबाव में कमी और संभावित आंशिक जल कटौती (Water Cut) को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श शुरू हो चुका है। फिलहाल, मुंबई को इस आसन्न जल संकट के चक्रव्यूह से निकालने का एकमात्र रास्ता वरुण देव की कृपा और समय पर झमाझम बारिश का आगमन ही है।