मुंबई पुणे मिसिंग लिंक बेनिफिट्स (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक से हर साल बचेगा 2.7 करोड़ लीटर ईंधन, 272 करोड़ रुपये की होगी बचत

Mumbai Pune Missing Link News: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर शुरू हुए मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट से हर साल 2.7 करोड़ लीटर ईंधन और करीब 272 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।

सूर्यप्रकाश मिश्र

Mumbai Pune Missing Link Fuel Saving Travel Time News: देश इस समय पेट्रोल, डीजल,गैस आदि ईंधन संकट से गुजर रहा है। ऐसे में ईंधन बचत के छोटे बड़े उपाय भी किए जा रहे हैं,ताकि देश पर आयात का भार भी कम हो सके। पिछली 1 मई को यातायात के लिए शुरू हुए मुम्बई पुणे मिसिंग लिंक का भी देश का ईंधन बचाने में बड़ा योगदान होने वाला है।

मुंबई पुणे एक्सेस कंट्रोल हाइवे पर शुरू हुए बहुउद्देश्यीय कनेक्टिंग लिंक की वजह से हर साल 2.7 करोड़ लीटर फ्यूल की की बचत होने वाली है। यह अनुमान एआई बेस्ड कंपनी इंटैंगल्स ने अपनी एक सर्वे रिपोर्ट में लगाया है।

पूरे मिसिंग लिंक कॉरिडोर के शुरू होने से सालाना लगभग 272 करोड़ रुपए के फ्यूल की संभावित बचत का अनुमान लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि उक्त कंपनी ने कनेक्टिंग लिंक शुरू होने के पहले और बाद में भी मुंबई पुणे एक्सप्रेस वे पर सर्वे किया।

बसों के 24 प्रतिशत ईंधन बचे

  • बताया गया कि कनेक्टिंग लिंक से होकर जाने वाली यात्री बसों के औसत ईंधन बचत में 24 प्रतिशत तक की कमी पाई गई। इसके अलावा ट्रकों ने 18% ज़्यादा एवरेज स्पीड दर्ज की, जबकि तीन-एक्सल वाली गाड़ियों ने यह स्ट्रेच 20% कम समय में पूरा किया। इसके अलावा इस मिसिंग लिंक पर कम फ्यूल कंजम्पशन से हर साल 64,905 मीट्रिक टन CO₂ एमिशन को रोका जा सकता है।
  • इंटैंगल्स, जो कमर्शियल व्हीकल डोमेन में स्पेशलाइज़ेशन रखने वाली एक ग्लोबल AI-पावर्ड प्रेडिक्टिव इंटेलिजेंस कंपनी है, ने कनेक्टिंग लिंक के खुलने के बाद मुंबई-पुणे कॉरिडोर पर कमर्शियल व्हीकल परफॉर्मेंस का एक एनालिसिस जारी किया। इस एनालिसिस से पता चलता है कि कॉरिडोर में बेहतर मूवमेंट से सालाना 2.7 करोड़ लीटर ईंधन बचत के साथ सालाना फ्यूल कॉस्ट में लगभग 272 करोड़ की कमी आएगी।

कमर्शियल गाड़ियों पर एनालिसिस स्टडी

कनेक्टिंग लिंक पर चार कमर्शियल गाड़ियों बसें, MCV ट्रक, थ्री-एक्सल गाड़ियां और मल्टी-एक्सल ट्रकों में परफॉर्मेंस में बढ़ोतरी दर्ज की गई। MCV ट्रकों ने एवरेज स्पीड में सबसे ज़्यादा 18% की बढ़ोतरी दर्ज की, साथ ही ट्रैवल टाइम में 19% की कमी और फ्यूल की खपत में 17% की कमी दर्ज की।

थ्री-एक्सल गाड़ियों में ट्रैवल टाइम में सबसे ज़्यादा 20% की कमी देखी गई, जबकि बसों में हर ट्रिप में फ्यूल की खपत में सबसे ज़्यादा 24% का सुधार हुआ। मल्टी-एक्सल ट्रकों के स्पीड, ट्रैवल टाइम और फ्यूल के इस्तेमाल में भी कमी देखी गई।

इंटैंगल्स के CEO, अनूप पाटिल ने कहा, "फ्यूल ऑपरेशनल एफिशिएंसी का सीधा माप है, और इतना माल ढोने वाले कॉरिडोर पर, हर ट्रिप में मामूली बचत भी बड़ा आर्थिक बदलाव ला सकती है। इंटैंगल्स के चीफ़ AI साइंटिस्ट हरिहरन रविशंकर ने कहा, "ज़्यादातर इंफ्रास्ट्रक्चर इम्पैक्ट असेसमेंट मॉडल के अंदाज़ों पर निर्भर करते हैं, जिसमें ट्रैफिक वॉल्यूम पर फिक्स्ड कंजम्प्शन रेट लागू होते हैं। जो बात इस एनालिसिस को अलग बनाती है, वह यह है कि हर फ्यूल का आंकड़ा असली गाड़ी के सेंसर स्ट्रीम से आता है, जिसे टेरेन-अवेयर एल्गोरिदम के ज़रिए प्रोसेस किया जाता है, जो ग्रेडिएंट, लोड बिहेवियर और रियल-टाइम ड्राइविंग पैटर्न को ध्यान में रखते हैं। जैसे-जैसे भारत का ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ रहा है, इस तरह का सेंसर-बेस्ड मेज़रमेंट फ्रेमवर्क प्लानर्स, ऑपरेटर्स और पॉलिसीमेकर्स के लिए फायदेमंद है।"

इस एनालिसिस में बसों, MCV ट्रकों, 3-एक्सल गाड़ियों और मल्टी-एक्सल ट्रकों में 1,849 यूनिक कमर्शियल गाड़ियों को ट्रैक किया गया, जिसमें मुंबई-पुणे कॉरिडोर के घाट सेक्शन से 2,200 से ज़्यादा ट्रिप कवर किए गए। स्पीड और यात्रा का समय GPS और जियो-लोकेशन डेटा के ज़रिए मापा गया। आंकी गई कमर्शियल गाड़ी कैटेगरी के लिए फ्यूल की खपत, इलाके के एनालिसिस और रियल-टाइम ड्राइविंग पैटर्न पर आधारित इंटैंगल्स के प्रोप्राइटरी एल्गोरिदम का इस्तेमाल करके निकाली गई।

देश का सबसे ऊंचा केबल स्टे ब्रिज

मुंबई-पुणे के बीच यात्रा को रोमांचक बनाने वाले 13.3 किमी लंबा पर देश का सबसे ऊंचा 180 मीटर का केबल स्टे ब्रिज कनेक्टिंग लिंक पर बनाया गया है। सह्याद्रि के दो पर्वतों के बीच बना यह केबल स्टे ब्रिज इंजीनियरिंग का शानदार मॉडल है।

दो दुर्गम पहाड़ों को जोड़ने वाले इस ब्रिज को बनाने में उन्नत इंजीनियरिंग का सहारा लिया गया। महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (एमएसआरडीसी) के माध्यम से देश की प्रमुख स्वदेशी कंपनी एफकॉन्स ने इन आइकॉनिक केबल स्टे ब्रिज का निर्माण किया है।

घटी दूरी, बच रहा समय

  • इसके साथ ही यहां 23.3 मीटर की दोहरी सुरंग बनाई गई है। राज्य के डिप्टी सीएम एवं एमएसआरडीसी के अध्यक्ष एकनाथ शिंदे के अनुसार केबल स्टे ब्रिज और अत्याधुनिक टनेल वाला यह कनेक्टिंग लिंक प्रोजेक्ट महाराष्ट्र में इंजीनियरिंग का एक और मार्वेल है।
  • इससे मुंबई पुणे हाइवे की दूरी 6 किमी घट गई है। मुंबई पुणे एक्सप्रेस पर रोजाना 75 हजार से ज्यादा वाहनों की आवाजाही होती है। इस मिसिंग लिंक के खुल जाने से एक्सप्रेस वे पर यात्रा में गति की गति बढ़ गई है। लोनावला खंडाला के घुमावदार मोड़ों से छुटकारा मिलने से मुंबई से पुणे के बीच वाहनचालकों का लगभग 20 से 25 मिनट बच रहा है।
  • कनेक्टिंग लिंक पर दुनिया की सबसे चौड़ी रोड टनल भी बनी है। हर टनल 23.50 मीटर चौड़ी है। इन टनल ने गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दुनिया की सबसे चौड़ी रोड टनल के तौर पर मान्यता दी गई है।

मुंबई से नवभारत लाइव के लिए सूर्यप्रकाश मिश्र की रिपोर्ट

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