प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

मुंबई शर्मसार, 8 साल की बच्ची से सुरक्षा गार्ड ने की दरिंदगी, पायधुनी थाने के बाहर भारी बवाल

Mumbai Paydhoni Case: मुंबई के पायधुनी में 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ सुरक्षा गार्ड की हैवानियत का मामला सामने आया है। आरोपी परवेज को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है।

गोरक्ष पोफली

Paydhoni Security Guard Assaults Minor Girl: मुंबई के पायधुनी इलाके से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक भयावह घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक बिल्डिंग के वॉशरूम में 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ उसी बिल्डिंग के सुरक्षा गार्ड ने रेप की वारदात को अंजाम दिया। इस घटना ने न केवल महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है, बल्कि राज्य की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था में व्याप्त असंतोष को भी हवा दे दी है।

जानकारी के अनुसार, घटना उस वक्त हुई जब मासूम बच्ची वॉशरूम गई थी। तभी आरोपी सुरक्षा गार्ड, जिसका नाम परवेज बताया जा रहा है, उसके पीछे अंदर घुस गया और इस घृणित अपराध को अंजाम दिया। आरोपी मूल रूप से झारखंड का रहने वाला है और पिछले छह महीनों से वहां काम कर रहा था। घटना के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया है।

सड़कों पर उतरा जन-सैलाब

इस वारदात की खबर फैलते ही इलाके में भारी तनाव फैल गया। सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग पायधुनी पुलिस थाने के बाहर जमा हो गए और बलात्कारी को फांसी दो के नारों के साथ जोरदार प्रदर्शन किया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि यातायात बाधित हुआ और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी थाने पहुंचकर लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

सरकारी योजनाओं और सुरक्षा पर राजनीतिक प्रहार

जहां एक ओर जनता सड़कों पर न्याय मांग रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इस मुद्दे को राज्य की कानून-व्यवस्था और सरकार की विफलताओं से जोड़ दिया है। शिवसेना ठाकरे गुट सांसद अरविंद सावंत ने हाल ही में सरकार की माझी लाड़की बहिन योजना पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने करोड़ों लोगों के वोट पैसे देकर लिए और अब 92 लाख महिलाओं के नाम योजना से हटा दिए गए हैं, जो कि संविधान का उल्लंघन है। सावंत ने राज्य की खराब आर्थिक स्थिति और सीएजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार को घेरा है।

पायधुनी की यह हृदयविदारक घटना और उसके बाद उपजा राजनीतिक घमासान इस बात का संकेत है कि जनता अब खोखले वादों से संतुष्ट नहीं होने वाली। चाहे वह 8 साल की मासूम की सुरक्षा हो या राज्य की कल्याणकारी योजनाएं, प्रशासन की जवाबदेही तय होना अनिवार्य है। आज महाराष्ट्र की जनता केवल सख्त कानून ही नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और पारदर्शी शासन की मांग कर रही है।

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