समाज के तानों से जूझ रहे अंगदाता परिवार (फोटो नवभारत)
मुंबई

Organ Donation: अपने खोए, किसी को जिंदगी दी; फिर भी समाज के तानों से जूझ रहे अंगदाता परिवार

Organ Donation In Mumbai: मुंबई के सायन अस्पताल में अंगदाता परिवारों ने सामाजिक तानों और आलोचना का दर्द साझा किया। परिजनों ने सरकार से जागरूकता बढ़ाने और अंगदाता परिवारों की मदद की मांग की।

आलोक उमाकृष्ण

Organ Donor Families Face Social Stigma: अंगदान करना नोबल जॉब माना जाता है। लेकिन जो परिवार ये काम करते हैं, उनके लिए राहें आसान नहीं होती हैं। अपने को खोने का दर्द और समाज के तानों चुभन वक्त के साथ उनके जीवन को और कठिन बना देती है।

मुंबई के सायन हॉस्पिटल में ZTCC की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में अंगदान करने वाले परिवारों का दर्द छलका, उन्होंने बताया कि वो किस तरह से सामाजिक आलोचना झेल रहे हैं।

लोग सुनाते है ताने

नवभारत से बातचीत में राजेश नंदा चन्ने ने बताया उन्होंने एक दुर्घटना में अपने चचेरे भाई प्रवीण अशोक चन्ने (45) 4 अप्रैल 2025 को खो दिया।

अस्पताल में प्रवीण के ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद परिवार ने उनके अंगदान का फैसला किया, ताकि मौत के बाद भी प्रवीण किसी और के शरीर में जिवित रहे प्रवीण की किडनी, फेफड़े, लिवर और आंखें दान की गई। तब से अब तक राजेश के परिवार को यही ताना सुनने को मिलता है कि उन्होंने पैसों के लिए प्रवीण का अंगदान किया।

किसी और को जीवन मिलेगा

वसइ रोड के रहने वाले संतोष दुबे के बेटे सत्यम दुबे (24) को एक सड़क दुर्घटना के बाद 23 अक्टूबर 2025 को ब्रेन डेड घोषित किया गया, परिवार ने लाख कोशिशें की लेकिन उसे बचा नहीं सके, तब परिवार ने अंगदान का फैसला किया, लेकिन तब उन्हें कुछ सोशल वर्कर ने फंसाने की कोशिश की, संतोष दुबे ने पूछा ऐसे कामों में भी लोग पैसा बनाना चाहते हैं, उन्हें शर्म नहीं आती?

आगे संतोष ने बताया आज भी उन्हें और उनकी पत्नी को लोग ताना मारते हैं कि आपने अपने बेटे के शव का सौदा किया, उनकी पत्नी ने नम आंखों के साथ बताया, बेटा तो वापस नहीं आएगा लेकिन उसके अंगों के जरिए किसी और को जीवन मिलेगा और इसी तरह वो जिवित तो है, सत्यम की भी, किडनी, लिवर, फेफड़ा, आंखें और टिशू दान किया गया है।

परिवार ने सरकार से की गुजारिश

वहां मौजूद बाकी परिवारों में सभी की यही समस्या है कि उन्हें नोबल जॉब के बाद लोगों के तानों का सामना करना पड़ रहा है, सभी परिवार की महाराष्ट्र सरकार से गुजारिश है कि वो लोगों में अवेयरनेस फैलाए ताकि अंगदान करनेवाले परिवारों को आलोचना ना झेलनी पड़े।

राजेश ने मांग की है कि प्रवीण जैसे लोगों के परिवार की सरकार को मदद करनी चाहिए उनकी बेटी ने 10 वीं में 92 प्रतिशत अंक हासिल किया है उसकी कुछ मदद होनी चाहिए।

ZTCC के प्रेसिडेंट डॉ. एस. के. माथुर ने लोगों से मांग की है कि लोगों को ऐसे परिवारों की मदद के लिए आगे आना चाहिए और सोशल वर्क के नाम पर ऐसे परिवारों के साथ ठगी करने वालों को अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।

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