Mumbai Mayor Bungalow: मुंबई के महापौर बंगले के नूतनीकरण के मुद्दे के कारण इन दिनों सियासी पारा चढ़ा हुआ है।पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस विषय को लेकर अपनी पार्टी शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) के नगरसेवकों की भूमिका पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।उन्होंने कड़े शब्दों में पूछा है कि जब जनता के पैसों का इस तरह अपव्यय हो रहा था, तो वे चुप क्यों बैठे रहे।
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर वर्षों से काबिज शिवसेना की सत्ता को उखाड़ फेंकते हुए भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार अपना वर्चस्व स्थापित किया है।वर्तमान में रितू तावडे मुंबई की नई महापौर के रूप में पदभार संभाल रही हैं।जिम्मेदारी संभालते ही महापौर तावडे ने अपने आधिकारिक निवास स्थान के नूतनीकरण का काम शुरू करवाया है, लेकिन अब इसके खर्च के आंकड़ों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
मूल महापौर निवास को बालासाहेब ठाकरे के स्मारक के लिए दिए जाने के बाद, नया महापौर निवास भायखला में स्थानांतरित कर दिया गया था।पिछले चार वर्षों से बीएमसी में प्रशासक का शासन होने के कारण यह बंगला बंद पड़ा था। अब इसके नूतनीकरण के लिए 3 करोड़ 40 लाख रुपए से अधिक का खर्च प्रस्तावित है।चौंकाने वाली बात यह है कि इसी साल जनवरी में इस पर 75 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं।जो खर्च पहले लाखों में था, वह अचानक करोड़ों में पहुंचने के कारण विपक्ष के निशाने पर है।
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इस फिजूलखर्ची के मुद्दे को लेकर उद्धव ठाकरे ने अपने नगरसेवकों की जमकर क्लास लगाई है। सूत्रों के अनुसार, ठाकरे ने इस बात पर नाराजगी जताई कि नगरसेवकों ने सदन में इस मुद्दे को आक्रामकता के साथ क्यों नहीं उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी पर चुप्पी साधकर उन्होंने सत्ता पक्ष को वॉकओवर क्यों दिया। इस फटकार के बाद अब मुंबई की राजनीति में नूतनीकरण के इस मुद्दे के और तूल पकड़ने की संभावना बढ़ गई है।