Mumbai Track Crossing Surge: मुंबई में रेलवे ट्रैक पार करने की प्रवृत्ति ने रेलवे की चिंता बढ़ा दी है। जनवरी से जुलाई के बीच ट्रैक क्रॉसिंग के 8,411 मामले दर्ज हुए, जिनमें अकेले जुलाई में 4,550 मामले सामने आए।
यानी सात महीनों के कुल मामलों का 54% जुलाई में दर्ज हुआ। कार्रवाई के बावजूद यात्रियों की जान के साथ लोकल सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। जनवरी से जुलाई तक कुल 8,411 मामले सामने आए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सात महीनों के आधे से ज्यादा मामले अकेले जुलाई में दर्ज किए गए।
मुंबई में पैदल पुल, सबवे या अधिकृत रास्ते का इस्तेमाल करने के बजाय रेलवे ट्रैक पार करने की यात्रियों की जल्दबाजी गंभीर खतरे में बदलती जा रही है। जनवरी से जुलाई के बीच ट्रैक पार करने के कुल 8,411 मामले दर्ज किए गए। इनमें जुलाई में अकेले 4,550 मामले सामने आए।
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में 438, फरवरी में 796, मार्च में 563, अप्रैल में 312 और मई में 345 मामले दर्ज हुए। जून में यह संख्या बढ़कर 1,407 हो गई। इसके बाद जुलाई में अचानक बड़ा उछाल आया और मामले 4,550 तक पहुंच गए।
जनवरी से जुलाई के बीच दर्ज कुल 8,411 मामलों में अकेले जुलाई के 4,550 मामले करीब 54% हैं। आंकड़े बताते हैं कि ट्रैक क्रॉसिंग की समस्या जुलाई में अचानक कितनी गंभीर हुई।
मुंबई लोकल रेलवे ट्रैक पार करना सिर्फ संबंधित व्यक्ति की जान के लिए खतरा नहीं है, बल्कि इससे मुंबई की लोकल सेवाओं का परिचालन भी प्रभावित होता है। ट्रैक पर हादसा होने की स्थिति में संबंधित स्थान पर लोकल ट्रेन रोकनी पड़ती है।
इसके कारण पीछे चल रही ट्रेनों की फेरियां प्रभावित होती हैं और हजारों यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ सकता है। यानी एक व्यक्ति द्वारा कुछ मिनट बचाने के लिए लिया गया जोखिम कई यात्रियों के लिए लंबी देरी का कारण बन सकता है।
सात महीनों में दर्ज 8,411 मामलों में 5,535 मामलों में दंडात्मक कार्रवाई की गई, जबकि 2,876 मामलों में न्यायालयीन कार्रवाई हुई। इस दौरान कुल 38 लाख 80 हजार 697 रुपये का जुर्माना वसूला गया। जुलाई में दर्ज 4,550 मामलों में से 4,549 मामलों में दंडात्मक कार्रवाई हुई और केवल एक मामले में न्यायालयीन कार्रवाई की गई।
आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सिर्फ जुर्माना लगाने से ट्रैक पार करने की प्रवृत्ति पर पूरी तरह रोक नहीं लग रही है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी निगरानी, लगातार जागरूकता अभियान और जरूरत वाले स्थानों पर भौतिक अवरोध जैसे उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता सामने आ रही है।