कुर्ला-ट्रॉम्बे में 3,500 लोगों को 30 दिन में घर खाली करने का नोटिस।
समयसीमा के बाद झुग्गियां ढहाने की चेतावनी।
प्रभावितों के ₹2,000 मासिक अनुदान को मंजूरी का इंतजार।
Mumbai Railway Encroachment Eviction: कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे साइडिंग के पास बसी झुग्गियों पर अब बेदखली की तलवार लटक रही है। मध्य रेलवे ने करीब 3,500 निवासियों को 30 दिनों के भीतर जगह खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है।
इसमें तय समय में अतिक्रमण नहीं हटाने पर बलपूर्वक बेदखली और झुग्गियां ढहाने की चेतावनी दी गई है। दूसरी ओर प्रभावित परिवारों को 6 माह तक हर माह 2,000 रुपए अनुग्रह अनुदान देने के लिए 4।20 करोड़ रुपए का प्रस्ताव अब भी मंजूरी की प्रतीक्षा में है।
नोटिस में निवासियों से अपील की गई है कि वे अनुदान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अपने बैंक खाते का विवरण दें और सात दिनों के भीतर संबंधित रेलवे अधिकारियों से संपर्क करें, वहीं, बेदखली की समय-सीमा के बीच प्रभावित परिवारों की चिंता बढ़ गई है। बंबई उच्च न्यायालय ने कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे साइडिंग पर अतिक्रमण के मामले में 7 अक्टूबर 2026 को रिट याचिका क्रमांक 86/202 में अंतिम आदेश दिया था।
इसके तहत एक सप्ताह के भीतर संबंधित स्थान पर नोटिस लगाकर निवासियों को मकान खाली करने के लिए एक महीने का समय देने का निर्देश दिया गया था। उसी के अनुसार मध्य रेलवे ने 15 अक्टूबर को नोटिस लगाने की कार्रवाई की है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि रेलवे की जमीन पर अनधिकृत रूप से रह रहे निवासी नोटिस जारी होने के 30 दिनों के भीतर जगह खाली कर दें।
निर्धारित समय में जगह खाली न करने पर बल प्रयोग कर निवासियों को हटाने और अतिक्रमण कर किए गए निर्माणों को ढहाने की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में अब इस बात पर नजर रहेगी कि नोटिस मिलने के बाद निवासी खुद ही जगह खाली करते हैं या समय-सीमा समाप्त होने के बाद रेलवे प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ती है।
कुर्ला-ट्रॉम्बे रेलवे साइडिंग के पास रेलवे की स्वामित्व वाली जमीन पर झुग्गियां बनी हुई है। रेलवे की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए और प्रस्तावित मार्ग विस्तार के लिए अतिक्रमित जमीन को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
अदालत के आदेशानुसार नोटिस जारी किए जा चुके हैं और तय समय-सीमा समाप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना है। दूसरी ओर यह भी देखना होगा कि प्रभावित निवासियों के प्रस्तावित अनुग्रह अनुदान को मंजूरी कब तक मिलती है।
मनपा और जिलाधिकारी की जमीन को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है। पात्र और अपात्र निवासियों की सूची तैयार नहीं की गई है और न ही आवश्यक परिशिष्ट बनाया गया है। नोटिस - बोर्ड लगाए जाने के बावजूद न्यायालय के आदेश के अनुसार कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इससे निवासियों में असमंजस का माहौल है।जहीर उद्दीन शेख, सचिव, राजू गांधी नगर, बर्मासिल लाइन
घर खाली करने के बाद हम कहां रहेंगे, यह हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल है। दो हजार रुपए के किराए में मुंबई में घर मिलना भी मुश्किल है। इसलिए घर खाली कराने से पहले प्रशासन को हमारे पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करनी चाहिए।जेन उद्दीन, स्थानीय निवासी