Mumbai Stray Dogs: स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बस डिपो और खेल परिसरों जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से पकड़े जाने वाले आवारा कुत्तों के आजीवन पालन-पोषण की जिम्मेदारी निजी संस्था को सौंपने का निर्णय बीएमसी ने लिया है। इन कुत्तों का नसबंदी और टीकाकरण करने के बाद उन्हें दोबारा उसी परिसर में छोड़ने के बजाय सीधे आश्रय केंद्र में रखा जाएगा।
इस परियोजना के लिए दो वर्ष के लिए 13 करोड़ 35 लाख 17 हजार रुपए खर्च प्रस्तावित किया गया है। यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए स्थायी समिति के समक्ष पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों, केंद्र सरकार के 'पशु जन्म नियंत्रण' नियमों और 'भारतीय पशु कल्याण बोर्ड' के दिशानिर्देशों के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों से पकड़े गए कुत्तों को उनके मूल स्थान पर नहीं छोड़कर स्थायी आश्रय देना अनिवार्य है। बीएमसी के पास फिलहाल अपना स्थायी आश्रय केंद्र उपलब्ध नहीं है।
इसलिए निजी संस्थाओं से ई-निविदाएं मंगाई गई थीं। इस प्रक्रिया में 'जेनिस शिफ्ट एनिमल वेलफेयर ट्रस्ट' ने 100 में से 100 तकनीकी अंक हासिल किए और प्रति कुत्ता प्रतिदिन औसतन 155 रुपए की सबसे कम दर पेश की। पहले चरण में 1,000 कुत्तों को संस्था के केंद्र में रखा जाएगा। प्रति कुत्ता प्रतिदिन 155 रुपए के हिसाब से एक वर्ष में 5 करोड़ 65 लाख 75 हजार रुपए और दो वर्षों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सहित करीब 13 करोड़ 35 लाख रुपए खर्च होंगे।
वहीं, एक कुत्ते के शेष संभावित 9 वर्ष के जीवनकाल में औसतन 6 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। इससे बीएमसी पर दीर्घकालीन आर्थिक बोझ पड़ने की बात भी कही गई है। संस्था के लिए कुत्तों को दिन में दो बार पौष्टिक आहार, स्वच्छ पानी और नियमित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
साथ ही कंप्यूटरीकृत रिकॉर्ड और भौगोलिक स्थान निर्धारण तकनीक के माध्यम से उनकी जानकारी दर्ज करनी होगी। बीएमसी के पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद ही भुगतान किया जाएगा। इस योजना से सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों के उपद्रव और कुते मानव संघर्ष को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।