मुंबई AQI रीडिंग सोर्स: सोशल मीडिया
मुंबई

AQI के दावे फेल, साफ हवा की खुली पोल, मुंबई के बांद्रा-खार में AQI मीटर दिखा रहे शून्य आंकड़े

Mumbai Fake AQI Readings: मुंबई के बांद्रा-खार निर्माण स्थलों पर एयर क्वालिटी मॉनिटर शून्य प्रदूषण दिखाने के आरोप। आवाज फाउंडेशन ने 230 तस्वीरों के विश्लेषण के बाद जांच और कार्रवाई की मांग की।

मनीषा बोंदरे

Highlights

  • बांद्रा, खार और पाली हिल के निर्माण स्थलों पर एयर क्वालिटी मॉनिटरों की रीडिंग संदिग्ध।

  • आवाज फाउंडेशन ने 38 दिनों में 230 बार डिस्प्ले की तस्वीरें लेकर आंकड़ों का विश्लेषण किया।

  • कई मौकों पर मॉनिटर बंद मिले या डिस्प्ले पर प्रश्नचिह्न और डैश दिखाई दिए।

  • सरकारी निगरानी केंद्रों के आंकड़ों से तुलना के बाद मॉनिटरिंग की विश्वसनीयता पर सवाल।

  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर छह मांगें रखीं।

Bandra Khar Fake AQI Readings Zero Aawaaz Foundation Mumbai: मुंबई के बांद्रा, खार और पाली हिल स्थित निर्माण स्थलों पर लगाए गए एयर क्वालिटी मॉनिटरों की रीडिंग पर आवाज फाउंडेशन ने सवाल उठाए हैं। संस्था के मुताबिक, 38 दिनों में 230 बार डिस्प्ले की तस्वीरें लेकर सरकारी निगरानी केंद्रों के आंकड़ों से तुलना की गई। कई मौकों पर मॉनिटर शून्य या बेहद कम प्रदूषण दिखाते मिले, जबकि कुछ डिस्प्ले बंद थे या उन पर स्पष्ट आंकड़े नहीं थे। संस्था ने मुख्यमंत्री और बीएमसी आयुक्त से जांच, कैलिब्रेशन और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

बांद्रा-खार में प्रदूषण मीटर की रीडिंग पर सवाल

मुंबई में वायु प्रदूषण की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बांद्रा, खार और पाली हिल जैसे इलाकों में निर्माण स्थलों पर लगाए गए एयर क्वालिटी मॉनिटरों की रीडिंग की विश्वसनीयता पर पर्यावरण संस्था आवाज फाउंडेशन ने चिंता जताई है। संस्था का आरोप है कि कई जगहों पर मॉनिटर प्रदूषण का स्तर शून्य या बेहद कम दिखा रहे हैं, जबकि इन आंकड़ों की विश्वसनीयता की जांच जरूरी है।

आवाज फाउंडेशन ने इस मामले में राज्य सरकार और मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) से सख्त कदम उठाने की मांग की है। संस्था के अनुसार, मॉनिटर पर दिखाई देने वाले आंकड़ों और सरकारी निगरानी केंद्रों के डेटा के बीच तुलना से कई विसंगतियां सामने आई हैं।

38 दिनों में 230 बार दर्ज की गई रीडिंग

आवाज फाउंडेशन ने मार्च, मई और सितंबर-अक्टूबर के दौरान बांद्रा और खार क्षेत्र के विभिन्न निर्माण स्थलों का दौरा किया। इस दौरान वहां लगाए गए डिजिटल एयर क्वालिटी डिस्प्ले बोर्ड की तस्वीरें ली गईं और उनका विश्लेषण किया गया।

संस्था के मुताबिक, 38 दिनों की अवधि में कुल 230 बार डिस्प्ले की तस्वीरें लेकर डेटा दर्ज किया गया। इसके बाद इन आंकड़ों की तुलना केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के 'समीर' ऐप पर उपलब्ध खेरवाड़ी और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स के सरकारी निगरानी केंद्रों की रीडिंग से की गई।

जांच के दौरान कुछ मॉनिटरों पर पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर शून्य या असामान्य रूप से कम दिखाई दिया। कुछ तारीखों पर मॉनिटर बंद मिले, जबकि अन्य मौकों पर डिस्प्ले पर आंकड़ों की जगह प्रश्नचिह्न और डैश नजर आए।

पीएम 2.5 और पीएम 10 के आंकड़ों में विसंगति

संस्था ने पाली हिल में नर्गिस दत्त रोड के पास स्थित एक निर्माण स्थल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां लगे मॉनिटर ने अप्रैल में कई बार पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर शून्य या बेहद कम दिखाया।

पीएम 2.5 हवा में मौजूद बेहद महीन कण होते हैं, जो सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं। वहीं, पीएम 10 में अपेक्षाकृत बड़े आकार के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। इन प्रदूषकों का स्तर बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार, पीएम 2.5 की 24 घंटे की औसत सांद्रता के लिए अनुशंसित सीमा 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। ऐसे में निर्माण स्थलों पर लगातार बेहद कम या शून्य रीडिंग दिखने की स्थिति में मॉनिटर की कार्यक्षमता और डेटा की सटीकता की जांच करना जरूरी है।

हालांकि, केवल अलग-अलग रीडिंग में अंतर से जानबूझकर आंकड़ों में हेरफेर साबित नहीं होता। इसके लिए उपकरणों की तकनीकी जांच, कैलिब्रेशन और संबंधित समय के वास्तविक प्रदूषण स्तर का सत्यापन आवश्यक है।

जन स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

आवाज फाउंडेशन ने चेतावनी दी है कि गलत या भ्रामक आंकड़ों के आधार पर नागरिक हवा की गुणवत्ता को लेकर गलत निष्कर्ष निकाल सकते हैं। इससे बच्चे, बुजुर्ग और सांस संबंधी समस्याओं के प्रति संवेदनशील लोग अपने दैनिक जीवन से जुड़े फैसले गलत जानकारी के आधार पर ले सकते हैं।

संस्था का कहना है कि निर्माण स्थलों पर प्रदूषण की सटीक निगरानी और आंकड़ों की सार्वजनिक उपलब्धता जरूरी है, ताकि नागरिकों को वास्तविक स्थिति का पता चल सके और प्रशासन समय पर कार्रवाई कर सके।

मुख्यमंत्री और बीएमसी आयुक्त को लिखा पत्र

इस मामले में आवाज फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े को पत्र लिखकर छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें निर्माण स्थलों पर लगे एयर क्वालिटी मॉनिटरों का सख्त ऑडिट और कैलिब्रेशन कराना, पीएम 2.5 के वास्तविक समय के आंकड़े ऑनलाइन उपलब्ध कराना तथा गलत या भ्रामक डेटा प्रदर्शित करने वाले मामलों में जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करना शामिल है।

संस्था ने प्रदूषण निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने पर जोर दिया है। अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से जांच और कार्रवाई को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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