MBBS Vs BHMS Mixopathy Controversy: राज्य के होम्योपैथी डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में रजिस्ट्रेशन देने के राज्य सरकार के फैसले के विरोध में महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD), इंडियन मेडिकल एसो. (IMA) सहित एमबीबीएस डॉक्टरों ने विरोध जताते हुए हड़ताल शुरू कर दी है।
MARD का कहना है कि CCMP ब्रिज कोर्स के आधार पर BHMS (होम्योपैथी) डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में रजिस्ट्रेशन देना सही नहीं है। एलोपैथी के डॉक्टर बीएचएमएस और बीएएमएस डॉक्टरों द्वारा आधुनिक दवाएं लिखने के खिलाफ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के 60 प्रतिशत से ज्यादा अस्पताल बीएएमएस और बीएचएमएस डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं। राज्य के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के अस्पतालों में तो एमबीएस डॉक्टरों की भारी कमी है। एमबीबीएस, एमडी डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में जाना ही नहीं चाहते। ऐसे में अधिकांश प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप-केंद्र बीएएमएस और बीएचएमएस डॉक्टर ही चला रहे हैं। कोविड काल में भी इन्हीं डॉक्टरों ने मोर्चा संभाला था।
वहीं बीएचएमएस यानी होम्योपैथी डिग्री वाले डॉक्टरों का कहना है कि शहरी अस्पतालों में उन्हें नर्सों से भी कम वेतन दिया जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि 5.5 साल की पढ़ाई के बाद भी उन्हें 25-30 हजार रुपये महीने पर रखा जाता है, जबकि ड्यूटी 12 घंटे तक की होती है। एक बीएचएमएस डॉक्टर ने कहा कि विडंबना यह है कि जो डॉक्टर्स और उनके संगठन होम्योपैथी का सबसे ज्यादा विरोध कर रहे हैं, उन्हींके कई निजी अस्पताल आज बीएचएमएस डॉक्टरों से चलवाए जा रहे हैं।
मुंबई, ठाणे सहित राज्य के शहरी इलाकों के अधिकांस निजी अस्पतालों में वार्ड से लेकर आईसीयू तक आयुष के डॉक्टर ही बहुत कम वेतन पर अच्छी सेवाएं दे रहे हैं। आयुष के डॉक्टरों का कहना है कि हमसे मरीज देखे जाते हैं, इमरजेंसी संभाली जाती है, लेकिन वेतन और मान-सम्मान दोनों नहीं मिलता। जो लोग मंच से होम्योपैथी को अवैज्ञानिक कहते हैं, उनके ही अस्पतालों में बीएचएमएस डॉक्टर ही ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक सेवाएं देते हैं। ये दोहरा रवैया है।
हड़ताल कर रहे डॉक्टरों का बड़ा मुद्दा मिक्सोपैथी है। उनका आरोप है कि सरकार आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी का मिश्रण कर मरीजों के साथ खिलवाड़ कर रही है। उनका कहना है कि व्यापक, कानूनी रूप से सुदृढ़, पारदर्शी और वैज्ञानिक रूप से मान्य नियामक तंत्र के बिना बीएचएमएस-सीसीएमपी ढांचे के तहत कोई कार्यान्वयन या पंजीकरण नहीं होना चाहिए।
वैसे एलोपैथी और आयुष चिकित्सा के बीच टकराव होता आया है। इसी बीच मुंबई प्रेस क्लब ने होम्योपैथी और एलोपैथी के चिकित्सकों के बीच एक बहस का आयोजन किया। एलोपैथी का प्रतिनिधित्व कर रहे जयेश लेले ने सवाल किया कि अगर होम्योपैथिक डॉक्टरों द्वारा दी गई दवा से मरीजों पर कोई दुष्प्रभाव होता है तो क्या होगा? वहीं दूसरी ओर होम्योपैथी पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले बाहुबली शाह के अनुसार सरकार का कदम जरूरी था क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की संख्या कम है।
BHMS डॉक्टरों की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि वे सीमित दायरे में आधुनिक चिकित्सा करने के लिए प्रशिक्षित हैं, ऐसे में उन्हें कानूनी मान्यता मिलनी चाहिए। होम्योपैथी डॉक्टरों और CCMP कोर्स कर चुके BHMS डॉक्टरों का कहना है वे बहुत लंबे समय से भेदभाव झेल रहे हैं।
अब विवाद इस बात को लेकर है कि क्या CCMP कोर्स करने वाले BHMS डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन देकर आधुनिक चिकित्सा से जुड़े अधिकार देने चाहिए या नहीं। इसपर MARD का कहना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल शिक्षा प्रभावित होगी. वहीं, दूसरी ओर बीएचएमएस डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने सरकार से मान्यता प्राप्त CCMP प्रशिक्षण लिया है, जिसमें आधुनिक दवाओं और इमरजेंसी इलाज की भी ट्रेनिंग दी जाती है।