मालाड ट्रैफिक (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

Malad East: 10 मिनट का रास्ता, घंटों का सफर-लोग ट्रैफिक से परेशान

Mumbai News: मालाड ईस्ट के गांधी नगर से कुरार विलेज तक की सड़क पर भीषण ट्रैफिक जाम से लोग त्रस्त हैं। 10 मिनट का रास्ता घंटों में तय हो रहा है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

अपूर्वा नायक

Mumbai Traffic Update: मुंबई के मालाड पूर्व स्थित गांधी नगर से कुरार विलेज तक की सड़क पर लगने वाले भीषण ट्राफिक जाम से आम जनता त्रस्त है। प्रतिदिन इस मार्ग से गुजरने वाले नागरिकों को मात्र 10 मिनट की दूरी तय करने में घंटों लग जाते हैं।

यह समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। गांधी नगर ब्रिज से लेकर कुरार पुलिस स्टेशन हाईवे तक की दूरी घुमावदार होने के बावजूद लगभग 1.30 से 2 किलोमीटर है। इसके बावजूद यहां आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रैफिक जाम के प्रमुख कारणों में सड़क का संकरा और कम चौड़ा होना, अवैध फेरीवालों का अतिक्रमण, सड़कों पर अवैध पार्किंग और जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे शामिल हैं। इन समस्याओं के चलते वाहन रेंगते नजर आते हैं।

सुबह 10 बजे के बाद से लेकर दोपहर करीब 1।30 बजे तक यह सड़क भारी मालवाहक वाहनों और सब्जी सप्लाई करने वाले वाहनों की आवाजाही के कारण सबसे अधिक प्रभावित रहती है। इसके अलावा कुरार से सटे इलाकों में चल रहे निर्माण कार्यों की वजह से कंस्ट्रक्शन सामग्री ले जाने वाले ट्रक और पानी के टैंकर भी जाम को और बढ़ा देते हैं।

शव को लेकर श्मशान भूमि तक जाना भी पीड़ादायक

ट्रैफिक समस्या का खामियाजा स्कूली बच्चों को भी भुगतना पड़ता है। कई बार स्कूल बसे और एंबुलेस जैसे आपातकालीन वाहन भी जाम में फंस जाते हैं। जिससे गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इतना ही और सब्जी सप्लाई करने वाले वाहनों की आवाजाही के कारण सबसे अधिक प्रभावित रहती है।

इसके अलावा कुरार से सटे इलाकों नहीं, इस मार्ग से सटी श्मशान भूमि के कारण कई बार अंतिम यात्रा में शामिल लोगों को भी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है, जो बेहद संवेदनशील और पीड़ादायक स्थिति है।

भारी वाहनों के लिए तय किया जाए समय

  • स्थानीय रहिवासियों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं, बल्कि कई वर्षों से जस की तस बनी हुई है। लोग ट्रैफिक से स्थायी निजात चाहते हैं।
  • कुछ नागरिकों का सुझाव है कि बड़े और भारी वाहनों के लिए निश्चित समय-सारणी तय की जाए, जिससे आम समय में ट्रैफिक का दबाव कम हो सके और लोगों को कुछ राहत मिल सके।
  • अब देखना यह है कि संबंधित प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब और क्या कदम उठाता है।

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