मुंबई: महाराष्ट्र विधान परिषद ने वामपंथी उग्रवादी संगठनों की गैरकानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगाने संबंधी विधेयक को शुक्रवार को पारित कर दिया। हाराष्ट्र विशेष जन सुरक्षा विधेयक को गृह राज्य मंत्री (शहरी) योगेश कदम ने राज्य विधान परिषद में पेश किया। इस विधेयक को बृहस्पतिवार को विधानसभा ने पारित किया था। राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में विधेयक के पारित होने से राज्यपाल की स्वीकृति के बाद इसके कानून बनने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
इस विधेयक को लेकर विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है। विधान परिषद में विधेयक पेश होने के बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट करते हुए सभापति को असहमति पत्र सौंपा। इसके बाद इसे बहुमत से पास कर दिया गया।
महाराष्ट्र विशेष जन सुरक्षा विधेयक पर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि जैसा कि मैंने बताया, इस विधेयक में कहीं भी आतंकवाद या उग्रवाद का ज़िक्र नहीं है। इसलिए मेरा मानना है कि इसके तहत आम लोगों को कभी भी उठाकर जेल भेजा जा सकता है।
कांग्रेस ने कहा कि विपक्षी सदस्यों, नागरिक समाज और संवैधानिक विशेषज्ञों द्वारा उठाई गई महत्वपूर्ण चिंताओं को या तो नज़रअंदाज़ कर दिया गया है या दरकिनार कर दिया गया है। संयुक्त समिति ने महाराष्ट्र विशेष जन सुरक्षा (एमएसपीएस) विधेयक के पुराने संस्करण में केवल तीन औपचारिक संशोधन किए।
मंत्री योगेश रामदास कदम ने कहा कि 'वामपंथी उग्रवादी' शब्द असल में कांग्रेस ने ही गढ़ा था। इसका पहली बार इस्तेमाल 2006 में यूपीए सरकार के दौरान हुआ था। आज उद्धवजी उन्हीं कांग्रेसी नेताओं के साथ हैं। इसलिए कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि इस शब्द को किसने गढ़ा और इस्तेमाल किया?
समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आज़मी ने विशेष जन सुरक्षा विधेयक पर कहा यह बिल सरकार ने नक्सलवाद और माओवाद के खिलाफ पेश किया है। यह दोनों खत्म होने चाहिए क्योंकि यह देश के लिए खतरा हैं। लेकिन इस बिल के गलत इस्तेमाल होने के अधिक चांस हैं।
अबू आजमी ने कहा कि ऐसे कानून से पुलिस को अधिक ताकत मिलती है। जब टाडा बना तो उसमें बहुत बेकसूर लोग पकड़े गए। उसमें मैं भी पकड़ा गया। टाडा में आतंकवादी लोगों को पकड़ा जाता है, जो देश के खिलाफ खड़े रहते हैं। विशेष जन सुरक्षा विधेयक का विरोध हम इसलिए कर रहे हैं इस कानून के ज़रिए दलित और सरकार के खिलाफ आंदोलन करने वाले लोगों पर कार्रवाई करेंगे।