महाराष्ट्र विधानसभा (सोर्स: AI) 
मुंबई

महाराष्ट्र मानसून सत्र: रिकॉर्ड कामकाज और सेट विरोधी! विजेंद्र गुप्ता मॉडल से चूक गया महाराष्ट्र विपक्ष

Maharashtra Monsoon Session: महाराष्ट्र विधानसभा का मानसून सत्र 127 घंटे से अधिक चला। रिकॉर्ड कामकाज और कई विधेयक पास हुए, लेकिन विपक्ष की निष्क्रियता और नेतृत्व की कमी चर्चा का विषय रही।

आलोक उमाकृष्ण

Maharashtra Monsoon Session 2026: महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया। सत्र में रिकॉर्ड 127 घंटे से ज्यादा कामकाज हुआ और एक दिन तो सदन आधी रात के बाद भी चलता रहा। लेकिन इस रिकॉर्ड कामकाज के बीच विपक्ष लगातार तीसरी बार बिना नेता के रहा और सरकार पर हमला भी सीमित आक्रामक ही दिखा।

दिल्ली में केजरीवाल सरकार के दौरान गिने-चुने विधायकों के बावजूद बीजेपी के विजेंद्र गुप्ता जिस तरह सदन से सड़क तक सरकार को घेरते थे, महाराष्ट्र का विपक्ष उस 'विजेंद्र गुप्ता मॉडल' से सबक लेता नहीं दिखा।

इस वजह से विधानमंडल के गलियारे में ऐसी भी चर्चा चलती रही कि विपक्ष के ज्यादातर नेता और विधायक 'सेट' हैं। ये सभी पार्टी से ज्यादा निजी हित को महत्व दे रहे हैं।

18 घंटे की मैराथन बैठक और रिकॉर्ड विधेयक

विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बताया कि 14 बैठकों में 127 घंटे 54 मिनट का कामकाज हुआ। 9 जुलाई सुबह साढ़े नौ बजे शुरू हुई बैठक 10 जुलाई तड़के 3 बजकर 39 मिनट तक चली। यानी एक ही दिन में 18 घंटे 10 मिनट कामकाज हुआ, जो कई सालों बाद देखने को मिला।

सरकार के 22 में से 21 विधेयक विधानसभा से पास हुए, जबकि विधान परिषद ने नौ विधेयक पास किए। विधानसभा से पास 18 विधेयकों को परिषद ने भी मंजूरी दी।

विधायकों की अनुपस्थिति

सत्र के दौरान रिकॉर्ड कामकाज के बावजूद सदन में उपस्थिति को लेकर सवाल उठे। विधानसभा में सदस्यों की औसत उपस्थिति 75.26 प्रतिशत रही, जबकि विधान परिषद में यह आंकड़ा 78.57 प्रतिशत रहा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सख्त निर्देश के बाद भी सत्र के दौरान मंत्रियों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों खासकर सचिवों की लगातार अनुपस्थिति भी चर्चा में रही। सत्र में कुल 9095 सवाल आए, जिनमें से 410 स्वीकार हुए और सिर्फ 58 के जवाब सदन में दिए गए, बाकी सवालों के जवाब लिखित रूप से दिए गए।

विपक्ष चूका दबाव बनाने का मौका

बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और राकां (अजीत पवार) की महायुति सरकार 2.0 के कार्यकाल का यह लगातार तीसरा सत्र रहा, जिसमें विधानसभा और विधान परिषद दोनों में विपक्ष नेतृत्वविहीन रहा।

विपक्षी विधायकों की संख्या भले कम रही हो, लेकिन आंकड़ों के लिहाज से दिल्ली में बीजेपी की स्थिति उससे भी कमजोर थी, फिर भी विजेंद्र गुप्ता अकेले सरकार को घेरे रहते थे। महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी के नेता उस तेवर से चूक गए।

लोकलुभावन घोषणाओं के बीच समाप्त हुआ सत्र

सत्र के दौरान महिला किसान, डांस बार संशोधन विधेयक, यूसीसी और 2011 तक की झोपड़पट्टियों को संरक्षण जैसी घोषणाएं भी सुर्खियों में रहीं। 2998 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में से 292 स्वीकार हुईं और 62 पर चर्चा हुई।

सभापति राम शिंदे ने सत्र के अंत में सभी सदस्यों का सहयोग के लिए आभार जताया। अगला शीतकालीन सत्र सोमवार, 7 दिसंबर 2026 से नागपुर में शुरू होगा।

क्या राजनीति छोड़ रहे हैं नितिन गडकरी? संन्यास की अटकलों पर केंद्रीय मंत्री ने तोड़ी चुप्पी, जानिए पूरा सच

SECI Recruitment 2026: इंजीनियर समेत 28 पदों पर निकली भर्ती, 2.80 लाख तक सैलरी; 23 सितंबर तक करें आवेदन

कॉकरोच किसके लिए कहा गया था? CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का बड़ा दावा, जानें किसका लिया नाम

तरुण तेजपाल को जाना ही होगा जेल...सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराई याचिका, सरेंडर के लिए दिया दो हफ्ते का टाइम

जंतर-मंतर हिंसा से दिल्ली पुलिस ने ली सीख, तैयार किया नया प्लान, अब हर बड़े प्रदर्शन पर ऐसे रखी जाएगी पैनी नजर