Ladki Bahin Yojana Update: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना' को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्यव्यापी वेरिफिकेशन प्रक्रिया के बाद योजना के तहत रजिस्टर्ड हर 10 में से लगभग 4 महिलाओं के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक कुल 92 लाख से अधिक लाभार्थियों को इस योजना से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। यह आंकड़ा सरकार द्वारा पहले बताए गए 80 लाख के अनुमान से कहीं ज्यादा है।
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, लिस्ट से हटाए गए लोगों में सबसे बड़ी संख्या (लगभग 62 लाख लाभार्थी) उन महिलाओं की है, जो अपनी अनिवार्य ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाईं। इसके अलावा, बाकी बचे लोगों को जांच में अयोग्य पाया गया।
इस प्रोसेस से जुड़े अधिकारियों का अनुमान है कि वेरिफिकेशन के बाद हटाए गए लाभार्थियों को पेमेंट रुकने से पहले कुल मिलाकर लगभग 14,000 करोड़ रुपये मिल चुके थे। अधिकारियों ने बताया कि जिन लोगों का पेमेंट बंद किया गया, उन्हें औसतन लगभग 10 महीनों तक मदद मिली थी, हालांकि कोई एक निश्चित कट-ऑफ तारीख नहीं थी क्योंकि लाभार्थियों की पहचान वेरिफिकेशन प्रोसेस के अलग-अलग चरणों में की गई थी।
साल 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से ठीक पहले शुरू हुई इस योजना का बजट आवंटन अब 60,000 करोड़ रुपये से ऊपर निकल चुका है। यह योजना 21 से 65 साल की उम्र की उन महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये देती है जिनके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये से कम है। सरकारी कर्मचारियों, इनकम टैक्स देने वालों और कुछ दूसरी कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इस स्कीम में अभी 1.5 करोड़ से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं।
सितंबर 2025 में शुरू हुई वेरिफिकेशन प्रक्रिया से पहले, इसके लाभार्थियों की संख्या लगभग 2.43 करोड़ थी। ये नतीजे इसलिए अहम हैं क्योंकि कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने इस स्कीम के फाइनेंशियल मैनेजमेंट पर सवाल उठाए हैं।
महाराष्ट्र के 2024-25 के फाइनेंस के ऑडिट में, सीएजी ने बजट अनुमान, खर्च पर कंट्रोल और फाइनेंशियल मैनेजमेंट में बड़ी कमियों की ओर इशारा किया। इसमें बिना किसी ठोस वजह के लगभग 3,541 करोड़ रुपये का ज्यादा खर्च, तुरंत इस्तेमाल की जरूरत न होने के बावजूद सरकारी डिपॉजिट अकाउंट में 15,586 करोड़ रुपये जमा रखने और कमजोर फाइनेंशियल कंट्रोल का जिक्र किया गया। सीएजी ने सुझाव दिया कि बड़े डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम के लिए बजट बनाते समय लाभार्थियों की संख्या और फंड की जरूरतों का ज्यादा सही आकलन किया जाना चाहिए।
महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि लाडकी बहिन योजना जून 2024 में शुरू की गई थी। विधानसभा चुनाव और आचार संहिता के कारण ईकेवायसी प्रक्रिया पहले शुरू नहीं हो सकी। नई सरकार बनने के बाद अगस्त 2025 में ईकेवायसी शुरू की गई और बार-बार लाभार्थियों को स्पष्ट किया गया कि प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर भुगतान रोक दिया जाएगा।
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मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि भुगतान रोकने से पहले उन्हें कई अवसर दिए गए और समय-सीमा भी 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाई गई थी। सरकार ने किसी पात्र लाभार्थी को योजना से नहीं हटाया है। जिन्होंने ईकेवायसी पूरा नहीं किया, उनका भुगतान केवल प्रक्रिया पूरी होने तक रोका गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में भी स्पष्ट किया है कि पुरुष लाभार्थियों और सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर अन्य किसी लाभार्थी से राशि की वसूली नहीं की जाएगी।