बॉम्बे हाई कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

गुटखा-हुक्का मामले में नया मोड़, हाईकोर्ट में याचिका से महाराष्ट्र सरकार पर सवाल

Hookah Case Court: महाराष्ट्र में गुटखा-हुक्का मामले में विभागीय रुख को लेकर विवाद गहरा गया है। हाईकोर्ट में पेश पक्ष के बाद जब्त माल रिलीज होने से व्यापारियों और प्रशासन के बीच नई बहस छिड़ गई है।

अपूर्वा नायक

Hookah Business Legal Dispute India: महाराष्ट्र मेडिकल एजुकेशन एंड फार्मास्युटिकल्स डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी धीरज कुमार ने एफडीए कमिश्नर श्रीधर डुबे-पाटिल से समन्वय कर कोर्ट में पेश की भूमिका से बवाल मचा है।

गुटखा और हुक्का व्यापारियों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार ने जैसी मेहरबानी सिर्फ एक हुक्का व्यापारी पर दिखाई है, उसी तरह सभी को छूट दी जाए, ताकि, महाराष्ट्र में गुटखा और हुक्का बनाने की इजाजत सभी को मिल जाए।

बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका की सुनवाई जल्द होने की उम्मीद है। डिपार्टमेंट को दिसंबर 2025 में में गुप्त सूचना मिली थी कि आयुर्वेदिक हुक्का के नाम पर असल में गलत काम चल रहा था, जिसके बाद भिवंडी की हाई स्ट्रीट इम्पेक्स एलएलपी और पुणे की सोएक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों पर छापे मारे गए।

छापे में जब्त किए गए सामान के सैंपल सरकारी लैब में भेजे गए, जिसमें मोलासिस, सुक्रोज, ग्लिसरीन, खुशबूदार सुपारी और निकोटीन पाया गया। इस वजह से प्रिवेंशन एक्ट के तहत भिवंडी के वेयरहाउस से कब्जे में किए गए 10 करोड़ रुपये के सामान को जब्त किया गया और पुणे में प्रोडक्शन सेंटर को सील कर दिया गया।

कोर्ट ने जब्त माल को रिलीज करने का दिया आदेश

साथ ही कुछ कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया गया। विभाग की इस कार्रवाई के खिलाफ आरोपियों ने जब्त किए सामान को छुड़ाने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन प्रतिबंधित पदार्थों के इस्तेमाल के कारण पुणे और भिवंडी की अदालतों ने जब्त किए गए सामान को नहीं छोड़ा और गिरफ्तार लोगों को जमानत देने से भी मना कर दिया।

आरोपियों ने फिर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर केस रद्द करने की मांग की, जिसका सरकार ने विरोध किया। इसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन फाइल कर मांग रखी कि, उसके खिलाफ की गई कार्रवाई गलत है और जब्त किया गया माल रिलीज किया जाए, इस पर कोर्ट ने कमिश्नर को दोबारा एफिडेविट जमा करने का आदेश दिया।

कमिश्नर के बजाय कोर्ट में विभाग के सचिव धीरज कुमार के पत्र द्वारा पक्ष रखा गया कि, जब्त किए गए प्रतिबंधित उत्पाद को सुरक्षित रूप से दूसरे राज्य में ले जाने पर विभाग को कोई आपति नहीं है। इसी के आधार पर कोर्ट ने जब्त माल को रिलीज करने का आदेश दिया।

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