Maharashtra Govt Defense Solar Project Land Allotment: युवाओं को रोजगार और औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दारूगोला, विस्फोटक, रक्षा सामग्री और सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर राजस्व विभाग ने हरेगांव मला स्थित खेती कॉर्पोरेशन की 4200 एकड़ जमीन इस महा प्रोजेक्ट के लिए मंजूर कर दी है।राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में जमीन आवंटन को हरी झंडी दी गई। इस फैसले के तहत डीआरडीओ को अनुसंधान के लिए 1500 एकड़, महाऊर्जा को सौर व पवन ऊर्जा पार्क के लिए 1200 एकड़ और निबे ऑर्डिनेंस कंपनी को रक्षा सामग्री उत्पादन के लिए 1500 एकड़ जमीन दी जाएगी।
रक्षा, अनुसंधान और सौर ऊर्जा जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए आवंटित की गई 4200 एकड़ जमीन को लेकर सरकार ने कड़े और पारदर्शी नियम तय किए हैं। राजस्व विभाग के फैसले के अनुसार, यह पूरी जमीन संबंधित रक्षा और ऊर्जा संस्थाओं को 49 वर्षों की दीर्घकालिक लीज (किराए) पर दी जाएगी। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत प्रति एकड़ जमीन के लिए 50 हजार रुपये का वार्षिक किराया निर्धारित किया गया है।
आर्थिक सुरक्षा और नियमों की पाबंदी सुनिश्चित करने के लिए कंपनियों के सामने एक अनिवार्य शर्त रखी गई है, जिसके मुताबिक उन्हें शुरुआती तीन वर्षों की पूरी किराया राशि एडवांस (अग्रिम) के रूप में सरकार के पास जमा करनी होगी। कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलते ही इस वित्तीय और कानूनी प्रक्रिया को गति दी जाएगी, जिससे इस महा-प्रोजेक्ट का काम जल्द से जल्द शुरू हो सके।
यह भी पढ़ेः- छत्रपति संभाजीनगर में मोहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से मनाने की तैयारी, 444 पुलिसकर्मियों का रहेगा बंदोबस्त
बड़े औद्योगिक और रक्षा प्रोजेक्ट्स की स्थापना के साथ-साथ फडणवीस सरकार ने स्थानीय किसानों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा है। राजस्व विभाग और मंत्रिमंडल उपसमिति के निर्णय के अनुसार, इस महा-परियोजना के लिए भूमि आवंटित करने के बाद भी किसानों के कल्याण के लिए एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित रखा गया है। खेती कॉर्पोरेशन के पास बचने वाली 2300 एकड़ जमीन और अन्य 1600 एकड़ भूमि को मिलाकर कुल 3900 एकड़ का एक विशाल भूभाग स्थानीय किसानों के बीच वितरित किया जाएगा।
उपसमिति द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, राज्य कैबिनेट की अंतिम हरी झंडी मिलने के तुरंत बाद जमीन वितरण की यह पूरी प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी जाएगी। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में मंत्री दादा भुसे और पंकजा मुंडे भी विशेष रूप से उपस्थित थीं, जिन्होंने इस किसान-हितैषी फैसले का समर्थन किया।