Maharashtra EV Policy Industry Incentives: महाराष्ट्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत इलेक्ट्रिक वाहन और उनसे संबंधित सामग्री बनाने वाले पात्र उद्योगों को तालुका वर्गीकरण की शर्त से मुक्त कर दिया है।
महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2025 को सामूहिक प्रोत्साहन योजना-2019 से जोड़कर अब राज्य के किसी भी तालुका में स्थापित पात्र सूक्ष्म, लघु, मध्यम, विशाल और अति विशाल प्रकल्पों को प्रोत्साहन मिल सकेगा। यह नीति 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी।
हालांकि, निवेश और रोजगार के निर्धारित मानदंड पूरे करने वाले प्रकल्पों को यह लाभ मिलेगा, जबकि इलेक्ट्रिक वाहन के पुर्जे, बैटरी और अन्य संबंधित उत्पाद बनाने वाली इकाइयों के लिए अपने कम से कम 50 प्रतिशत उत्पादन की बिक्री ईवी निर्माताओं को करना अनिवार्य होगा।
राज्य सरकार के उद्योग, निवेश, सेवा व खनिजकर्म विभाग द्वारा बुधवार को जारी जीआर के अनुसार नीति के तहत राज्य में स्थापित बड़े, मध्यम, लघु और सूक्ष्म उत्पादन उद्योगों को ड-प्लस श्रेणी के लाभ मिलेंगे।
अति विशाल प्रकल्पों के लिए 1500 करोड़ से अधिक का निवेश पात्र सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों के लिए 50 करोड़ रुपए तक का निवेश, बड़े प्रकल्पों के लिए 50 से 100 करोड़ रुपए
का निवेश अथवा 150 प्रत्यक्ष रोजगार, विशाल प्रकल्पों के लिए 100 करोड़ रुपए से अधिक निवेश अथवा 250 रोजगार और अति विशाल प्रकल्पों के लिए 1500 करोड़ रुपए से अधिक निवेश अथवा 3000 प्रत्यक्ष रोजगार का मानदंड तय किया गया है।
इलेक्ट्रिक वाहन के पुर्जे, बैटरी और अन्य संबंधित उत्पाद बनाने वाली इकाइयों को अपने कम से कम 50 प्रतिशत उत्पादन की बिक्री इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को करना अनिवार्य होगा।
इसके लिए एंड यूज सर्टिफिकेट जमा करना होगा। प्रमाणपत्र जमा होने के बाद ही औद्योगिक प्रोत्साहन अनुदान के दावों को मंजूरी मिलेगी।
सभी पात्र इकाइयों पर सामूहिक प्रोत्साहन योजना की मौजूदा शर्ते लागू रहेंगी। विशाल और अति विशाल प्रकल्पों के आवेदन की जांच के बाद प्रधान सचिव, उद्योग स्तर से ऑफर लेटर जारी किया जाएगा।
पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने, अनुदान के दावे मंजूर करने और राशि वितरित करने की जिम्मेदारी उद्योग आयुक्तालय की होगी