महाराष्ट्र में सूखे की समीक्षा के लिए CM देवेंद्र फडणवीस की बैठक से दोनों उपमुख्यमंत्रियों की गैरमौजूदगी पर सवाल।
शिंदे गुट ने एकनाथ शिंदे को बैठक में नहीं बुलाए जाने पर नाराजगी जताई।
किसानों की राहत और केंद्र से सहायता के बीच महायुति में समन्वय को लेकर चर्चा तेज।
Maharashtra Drought Review Meeting: महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति और किसानों की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास 'वर्षा' पर रविवार को केंद्रीय दल के साथ अहम बैठक हुई।
हालांकि, इस बैठक में महायुति सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार शामिल नहीं हुए। इसे लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर नाराजगी की चर्चा शुरू हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाए हैं।
शिवसेना के शिंदे गुट का कहना है कि 5 अक्टूबर को एकनाथ शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति और किसानों की परेशानियों से अवगत कराया था। इस दौरान उन्होंने केंद्र से सहायता की मांग की थी।
शिंदे गुट के अनुसार, इसके बाद ही राज्य में स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय दल भेजने का आश्वासन मिला था। ऐसे में सूखे की समीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठक में शिंदे को आमंत्रित नहीं किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि महायुति सरकार में सभी सहयोगी दलों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर विश्वास में लेना जरूरी है। उनका कहना है कि किसानों की आर्थिक मदद, राहत पैकेज और केंद्र से सहायता जैसे विषयों पर चर्चा के दौरान दोनों उपमुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति से गठबंधन के भीतर समन्वय को लेकर सवाल पैदा होते हैं।
महाराष्ट्र राज्य के कई हिस्सों में सूखे और फसल नुकसान की स्थिति के बीच किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। ऐसे समय में सरकार के भीतर समन्वय को लेकर उठ रही चर्चाएं राजनीतिक महत्व रखती हैं। सहयोगी दलों के नेताओं का कहना है कि किसानों से जुड़े फैसलों में सभी प्रमुख घटकों की भागीदारी जरूरी है।
सूखे की समीक्षा के साथ-साथ प्रभावित किसानों के लिए राहत उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है। बैठक में दोनों उपमुख्यमंत्रियों को शामिल नहीं किए जाने के कारणों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, इस घटनाक्रम को लेकर महायुति के भीतर असंतोष की चर्चाएं जारी हैं।