Jaggery Price Fall: देश में चीनी की कीमतों में मजबूती के बीच गुड़ बाजार में अप्रत्याशित रूप से नरमी का रुख देखने को मिल रहा है। बताया गया कि अचानक मांग कमजोर होने के कारण गुड़ के भाव में बीते करीब एक महीने में ऊपरी स्तर से लगभग 800 रुपए प्रति क्विंटल तक की गिरावट दर्ज की गई है।
कारोबारियों के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मंडियों में नए गुड़ की आवक बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर के अनुसार, हापुड़ मंडी में नए गुड़ खुरपा की करीब 15 कट्टों की आवक हुई। मुहूर्त कारोबार में इसके भाव 6,500 रुपए प्रति क्विंटल रहे। वर्तमान में गुड़ पेड़ी 5,800-6,000 रुपये, चाकू 5,800-5,900 रुपये और ढैया 6,200-6,400 रुपए प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
मुजफ्फरनगर मंडी में स्टॉकिस्टों की बिकवाली के चलते चाकू कोल्ड के भाव में करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आई और भाव 5,200-5,300 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। 7 सितंबर के आसपास मंडी में गुड़ का स्टॉक करीब 1,84,689 कट्टे बताया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 52,435 कट्टे कम है। चांदपुर मंडी में कमजोर मांग के कारण गुड़ लड्डू के भाव घटकर करीब 6,100 रुपए प्रति क्विंटल रह गए। मुंबई,कोल्हापुर में भी मांग कमजोर रहने से गुड़ में नरमी का रुख रहा।
व्यापारियों के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मंडियों में जल्द ही नए गुड़ की आवक बढ़ेगी। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों पर दबाव आ सकता है। अनुमान है कि आवक का दबाव बढ़ने पर गुड़ में करीब 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की और गिरावट संभव है, जिसके बाद बाजार में स्थिरता आने की संभावना है।
गुड़ का निर्यात इंडोनेशिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, नाइजीरिया और नेपाल जैसे देशों में भी होता है। ऐसे में घरेलू मांग के साथ निर्यात मांग भी आने वाले समय में गुड़ के बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
गुड़ के दाम में गिरावट से उपभोक्ताओं को सस्ता गुड़ मिलने की संभावना है, लेकिन किसानों को कम कीमत मिलने से उनकी आय पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, चीनी और गुड़ की कीमतों में अंतर बढ़ने पर घरेलू उपभोक्ताओं के बीच गुड़ की मांग को कुछ सहारा मिल सकता है।