Ancient Stitched Ship India Oman Voyage: प्राचीन समुद्री इतिहास को पुनर्जीवित करते हुए, भारतीय नौसेना के जहाज INSV कौंडिन्य ने अपनी पहली ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। 1 मार्च को रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मुंबई बंदरगाह पर एक भव्य समारोह के दौरान इस जहाज का स्वागत (Flag-in) किया। ओमान की सल्तनत से लौटकर आए इस जहाज ने न केवल अरब सागर की लहरों को मापा, बल्कि भारत और ओमान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को भी नई ऊर्जा दी।
यह जहाज केवल एक नौका नहीं, बल्कि भारत की लुप्त होती पारंपरिक जहाज निर्माण कला का एक जीवित प्रमाण है।
INSV कौंडिन्य की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण तकनीक है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह जहाज अजंता की गुफाओं में मिले 5वीं शताब्दी के चित्रण पर आधारित है। इसे 'स्टिच्ड शिप' (सिलाई वाला जहाज) तकनीक से बनाया गया है, जिसमें लकड़ी के तख्तों को लोहे की कीलों के बजाय नारियल की रस्सी (Coir rope) से हाथ से सिला गया है और प्राकृतिक राल (Resins) से सील किया गया है। यह प्राचीन भारतीय शिल्प कौशल और आधुनिक नौसेना के तकनीकी सत्यापन का एक अनूठा संगम है।
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INSV कौंडिन्य ने अपनी यात्रा 29 दिसंबर, 2025 को पोरबंदर से शुरू की थी और 14 जनवरी, 2026 को मस्कट के पोर्ट सुल्तान काबूस पहुंची। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य उन प्राचीन व्यापारिक मार्गों को फिर से जीवंत करना था, जिनसे कभी मसाले, वस्त्र और लोबान (Frankincense) का व्यापार होता था। मस्कट में भारतीय प्रवासी और ओमानी गणमान्य व्यक्तियों ने इस जहाज का गर्मजोशी से स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच साझा समुद्री विरासत और गहरे संबंधों को दर्शाता है।
मुंबई में इस सफल अभियान के समापन के बाद भारतीय नौसेना अब अगले मिशन की तैयारी कर रही है। वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने घोषणा की कि INSV कौंडिन्य जल्द ही अपनी दूसरी विदेशी यात्रा शुरू करेगा। यह यात्रा ओडिशा के पुरी से इंडोनेशिया के बाली तक होगी। यह मिशन 'इंडो-पैसिफिक' क्षेत्र में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और प्राचीन नौकायन परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम होगा।