Harshwardhan Sapkal vs Devendra Fadnavis (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

'गेट वेल सून फडणवीस': हर्षवर्धन सपकाल का पलटवार, मुख्यमंत्री के 'बुद्धि' वाले बयान को बताया बहुजनों का अपमान

Harshwardhan Sapkal vs Devendra Fadnavis: हर्षवर्धन सपकाल ने देवेंद्र फडणवीस के 'मूर्ख' वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने इसे बहुजन समाज और किसानों का अपमान बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।

अनिल सिंह

Get Well Soon Fadnavis Statement: महाराष्ट्र की राजनीति में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बीच छिड़ी जुबानी जंग ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। कुछ दिनों पहले सपकाल द्वारा की गई आलोचना पर पलटवार करते हुए फडणवीस ने उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से 'मूर्ख' कहा था। मुख्यमंत्री के इस बयान से आहत हर्षवर्धन सपकाल ने अब फडणवीस की मानसिकता पर कड़ा प्रहार किया है। सपकाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री को "गेट वेल सून" कहते हुए उनके बयान को बहुजन समाज के अपमान से जोड़ दिया है, जिससे राज्य में 'जाति बनाम बुद्धि' का विवाद गरमा गया है।

हर्षवर्धन सपकाल ने फडणवीस की टिप्पणी को "हास्यास्पद" करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री का उन्हें मूर्ख कहना उनकी हजारों वर्षों पुरानी उस मानसिकता को दर्शाता है, जो मानती है कि बुद्धि केवल एक विशेष जाति वर्ग का एकाधिकार है। सपकाल ने इसे बहुजन वर्ग की बुद्धिमत्ता को हीन समझने वाली सोच बताया और इसकी तुलना उस ऐतिहासिक मानसिकता से की जिसने छत्रपति शिवाजी महाराज को राज्याभिषेक से वंचित रखने का प्रयास किया था। सपकाल का यह पलटवार अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

बहुजन अस्मिता और 'बुद्धि' पर एकाधिकार का सवाल

सपकाल ने फडणवीस पर हमला तेज करते हुए कहा कि बहुजन समाज को ज्ञान और शक्ति से दूर रखना कुछ लोगों की पुरानी आदत रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने उनके द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों का जवाब देने के बजाय व्यक्तिगत अपमान का रास्ता चुना। सपकाल के अनुसार, जब भी बहुजन वर्ग का कोई नेता सत्ता से सवाल पूछता है, तो उसे 'बुद्धिहीन' साबित करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अपमान केवल उनका नहीं, बल्कि उन सभी किसानों और आदिवासियों का है जिनके हक की वे बात कर रहे हैं।

उद्योगपतियों को लाभ और किसानों की जमीन का मुद्दा

सपकाल ने दोहराया कि उनके मूल प्रश्न राज्य के संसाधनों की लूट को लेकर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी समुदायों की जमीनों पर अतिक्रमण कर खनिजों का खनन कर रही है। साथ ही, शक्तिपीठ राजमार्ग जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीनें हड़पी जा रही हैं, ताकि अडानी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाया जा सके। सपकाल ने खेद व्यक्त किया कि इन ठोस मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय फडणवीस ने अप्रासंगिक और अपमानजनक भाषा का सहारा लिया, जो एक मुख्यमंत्री पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है।

सड़क से सदन तक संघर्ष की चेतावनी

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि वे और उनकी पार्टी भ्रष्ट गठबंधन सरकार के खिलाफ अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों और आदिवासियों को बेघर करने की इस साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा। सपकाल ने साफ कर दिया कि कांग्रेस पार्टी पीड़ित भाइयों के अधिकारों के लिए आगामी विधानसभा सत्र में और सड़कों पर भी उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री को नसीहत दी कि वे व्यक्तिगत हमलों के बजाय राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर जवाब दें, अन्यथा जनता उन्हें आने वाले समय में कड़ा सबक सिखाएगी।

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