नितिन गडकरी (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
मुंबई

राजनीति में परिवारवाद पर जनता ले फैसला...कार्यकर्ताओं की हो रही अनदेखी, नितिन गडकरी की बड़ा बयान

Nitin Gadkari: गडकरी ने वंशवादी राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर गुस्सा आता है। उन्होंने जनता से पारिवारिक उत्तराधिकारियों को हराने का आह्वान किया।

अर्पित शुक्ला

Mumbai News: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को वंशवादी राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी पर उन्हें गुस्सा आता है। उन्होंने राजनीतिज्ञों के पारिवारिक उत्तराधिकारियों को हराने का आवाहन करते हुए कहा कि जनता को वंशवादी राजनीति पर अपने फैसले लेने चाहिए। गडकरी ने कहा कि राजनीति में बड़े नेताओं के रिश्तेदारों के लिए योग्य कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया जाता है, जो कि उन्हें बहुत खलता है।

गडकरी ने अपने एक साक्षात्कार के दौरान वंशवादी राजनीति की आलोचना करते हुए कहा, "मैं यह देखकर दुखी होता हूं कि जिन नेताओं ने वंशवाद की आलोचना की थी, वही बाद में अपने रिश्तेदारों को टिकट देने के लिए पूरा जोर लगाते हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि यह रवैया पार्टी के पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है। गडकरी ने कहा, "कभी 20-30 साल पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता, जब टिकट मांगने आते हैं, तो उनके बजाय नेता अपनी पत्नी, बेटे या किसी अन्य रिश्तेदार को टिकट दे देते हैं। यह बहुत बुरा है, और कार्यकर्ताओं के साथ नाइंसाफी है।"

राजनीति में वंशवाद पर सवाल

गडकरी ने साफ तौर पर कहा कि राजनीति में वंशवाद के बजाय योग्यता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने इस पर जोर देते हुए कहा कि जनता को अब इस पर निर्णय लेने की आवश्यकता है। गडकरी का मानना है कि वंशवादी राजनीति के कारण पार्टी और जनता दोनों को नुकसान हो रहा है, और इस पर एक कड़ा कदम उठाने की आवश्यकता है।

बीजेपी में भी परिवारवाद

गडकरी की यह टिप्पणी बीजेपी पर भी एक कटाक्ष मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी वंशवाद की राजनीति पर अक्सर विरोध करती रही है। बीजेपी ने कांग्रेस, ठाकरे परिवार, मुलायम सिंग यादव और लालू यादव जैसे राजनीतिक परिवारों पर वंशवाद का आरोप लगाया है। हालांकि, महाराष्ट्र में हो रहे स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी के कई विधायक, सांसद और मंत्रियों के परिजनों (मां, पत्नी, बच्चे या करीबी रिश्तेदारों) को उम्मीदवार बनाया गया है। इससे बीजेपी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को निराशा का सामना करना पड़ा है, जो इसे पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ मानते हैं।

बड़े नेताओं के परिजन निर्विरोध जीते

बीजेपी में परिवारवाद के आरोप को और अधिक बल तब मिला जब जामनेर नगर परिषद चुनाव में मंत्री गिरीश महाजन की पत्नी साधना महाजन ने बिना किसी मुकाबले के परिषद अध्यक्ष पद पर चुनाव जीत लिया। कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और अजीत पवार गुट की राकां के उम्मीदवारों ने चुनाव से हटने का फैसला किया, और साधना महाजन निर्विरोध निर्वाचित हो गईं। इसी तरह, राज्य सरकार में मंत्री जयकुमार रावल की मां नयन कुंअर रावल डोंडियाचा-वरवाडे नगर परिषद की अध्यक्ष निर्विरोध चुन ली गईं, क्योंकि उनके खिलाफ खड़ी शरयू भावसार का पर्चा ही रद्द कर दिया गया।

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