Crude Oil Import Dependency Reduction: कच्चे तेल के भारी-भरकम आयात बिल से भारतीय खजाने को बचाने के लिए पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20 Fuel) की शुरुआत को पूर्व बीपीसीएल प्रमुख ने एक गेम-चेंजर कदम बताया है। गोपालन ने कहा, "यह हमारी विदेशी तेल पर निर्भरता को चरणबद्ध तरीके से कम करने की दिशा में उठाया गया पहला ठोस कदम है। इसके बाद हमारा दूसरा और सबसे बड़ा फोकस रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज (सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन) के घरेलू बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।" उन्होंने बताया कि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए तेल कंपनियां अब पारंपरिक पेट्रोल पंपों की तर्ज पर हाइड्रोजन रिटेल आउटलेट्स स्थापित करने की व्यवहार्यता पर काम कर रही हैं।
कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में मची उथल-पुथल के बीच देश के भीतर ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में सरकारी तेल कंपनियों की भूमिका की उन्होंने जमकर सराहना की। गोपालन ने कहा कि स्थानीय स्तर पर आने वाली कुछ तकनीकी दिक्कतों को छोड़ दिया जाए, तो भारत के किसी भी हिस्से में ईंधन की कोई कमी या ड्राई-आउट की स्थिति पैदा नहीं होने दी गई। ओएमसी (OMCs) ने अपने वैश्विक नेटवर्क और कुशल आपूर्ति प्रबंधन के जरिए देश की ऊर्जा लाइनों को लगातार चालू रखा है, जो कि बेहद सराहनीय काम है।
ईंधन की खुदरा कीमतों (Retail Prices) पर बात करते हुए कृष्णकुमार गोपालन ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम ऊंचे होने के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, जिसका पूरा वित्तीय बोझ तेल कंपनियों ने खुद वहन किया है। वर्तमान में कंपनियों को पेट्रोल बेचने पर लगभग 13 से 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल की बिक्री पर लगभग 38 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी (लागत से कम पर बिक्री) हो रही है। यह घाटा कंपनियों के बैलेंस शीट पर बड़ा दबाव बना रहा है।
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इस भारी घाटे के बीच गोपालन ने भारतीय अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं के लिए एक उम्मीद की किरण भी दिखाई है। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अब धीरे-धीरे गिरने लगी हैं। इसके अलावा, वैश्विक तेल उत्पादक देशों और उपभोक्ता राष्ट्रों के बीच चल रही कूटनीतिक वार्ताओं से बेहद सकारात्मक और सफल संकेत मिल रहे हैं। यदि यह बातचीत पूरी तरह परवान चढ़ती है, तो आने वाले दिनों में तेल कंपनियों को अपने पुराने नुकसान की भरपाई करने में बड़ी मदद मिलेगी और घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में किसी बड़ी बढ़ोतरी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पूर्व बीपीसीएल चेयरमैन ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि भारत का दीर्घकालिक भविष्य पूरी तरह से 'हरित ऊर्जा' (Green Energy) पर टिका हुआ है। जैसे-जैसे देश के भीतर सौर पैनलों, पवन चक्कियों और एथेनॉल उत्पादन संयंत्रों की क्षमता बढ़ेगी, वैसे-वैसे देश का पैसा बाहर जाने से बचेगा। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के तहत उठाए जा रहे कदम न केवल पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाएंगे, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करेंगे, जिससे कच्चे तेल की अर्थव्यवस्था के प्रति देश की संवेदनशीलता हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।