मंत्री नितेश राणे, आईएएस राधेश्याम मोपलवार  सोर्स-सोशल मीडिया
मुंबई

पूर्व IAS राधेश्याम मोपलवार फिर विवादों में, 200 करोड़ की रेडियो क्लब जेट्टी परियोजना के ठेके पर उठे सवाल

Radheshyam Mopalwar Controversy: पूर्व IAS राधेश्याम मोपलवार की कंपनी को गेटवे ऑफ इंडिया के पास 200 करोड़ का ठेका मिलने पर विपक्ष ने सवाल उठाए। बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने आरोपों को खारिज किया।

रूपम सिंह

Maharashtra Radio Club Jetty Nitesh Rane Controversy: सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राधेश्याम मोपलवार फिर विवादों में घिर गए हैं। मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया के पास रेडियो क्लब पैसेंजर जेट्टी प्रोजेक्ट के ठेके को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। विपक्षी नेताओं ने उनकी कंपनी को 200 करोड़ रुपए का सरकारी ठेका दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि मत्स्य व बंदरगाह विकास मंत्री नितेश राणे ने यह कहते हुए आरोपों को खारिज किया है कि बोलीदाताओं की ओर लगाई बोली के आधार पर ही नियमानुसार ठेका दिया गया है।

मोपलवार इस परियोजना से जुड़ी कंपनी में प्रमुख पदों से जुड़े बताए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि पूर्व में भ्रष्टाचार और बेहिसाब संपत्ति के आरोपों से घिरे अधिकारी से जुड़ी कंपनी को इस तरह के बड़ा ठेके देना नियमों के खिलाफ और पक्षपातपूर्ण है। वे पहले एसआरडीसी के एमडी रह चुके हैं।

2028 में पूरी होगी परियोजना

इस परियोजना के तहत रेडियो क्लब इलाके में एक मॉडर्न पैसेंजर जेट्टी बनाई जाएगी। समुद्री ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसमें एक नया पैसेंजर टर्मिनल, 1600 वर्ग मीटर का प्लेटफॉर्म, 10 बर्थिग जेट्टी और 12 मीटर चौड़ा एक्सेस रोड बनाया जाएगा। इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए

पार्किंग, टॉयलेट, पेयजल की सुविधा, वेटिंग रूम, स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सिक्योरिटी सिस्टम, फायर फाइटिंग की सुविधा और इलाके का सौंदर्याकरण किया जाएगा। परियोजना को 2028 के आखिरी तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार ने इसके लिए 229 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है।

एमएमबी ने मार्च में ठेका रद्द कर दिया था

  • गेटवे ऑफ इंडिया इलाके में रेडियो क्लब पैसेंजर जेट्टी परियोजना के लिए महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड (एमएमबी) ने मॉडर्न इंजीनियरिंग एंड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को लगभग 200 करोड़ रुपये का ठेका दिया है।

  • यह कंपनी पूर्व आईएएस अधिकारी मोपलवार की है जो इसके चेयरमैन और नॉन-एग्जीक्यूटिव ऑफिसर हैं।

  • पहले यह परियोजना आरकेसी प्रोजेक्ट्स के पास थी लेकिन काम की देरी की वजह से एमएमबी ने मार्च में ठेका रद्द कर दिया था।

  • उसके बाद नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया करके मोपलवार की कंपनी को चुना गया, इस बीच इस परियोजना के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में 3 अलग-अलग पिटीशन फाइल की गई। कोर्ट के इन तीनों पिटीशन को खारिज करने के बाद परियोजना के लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।

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