धनतेरस पर देश के खुदरा बाजारों में कुल ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक का व्यापार हुआ।
सोने और चांदी की बिक्री ₹66,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।
स्वदेशी अपनाओ के आह्वान से स्थानीय निर्माताओं और छोटे व्यापारियों को बड़ा फायदा मिला।
Dhanteras Business News: धनतेरस के अवसर पर इस वर्ष देशभर के खुदरा बाजारों में अभूतपूर्व खरीदारी देखने को मिली। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार, धनतेरस पर देश का कुल व्यापार ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया। वहीं, सोने और चांदी का कारोबार अकेले ₹66,000 करोड़ के पार पहुंच गया है। बुलियन, ज्वैलरी, ऑटोमोबाइल, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों सहित लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों में ग्राहकों की भारी भीड़ रही।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं सांसद प्रवीन खंडेलवाल के अनुसार धनतेरस ने एक बार फिर भारतीय पारंपरिक बाजारों की मजबूती और व्यापारी समुदाय की सक्रियता साबित की है। कैट के उपाध्यक्ष एवं ठाणे जिला होलसेल व्यापारी वेलफेयर महासंघ के अध्यक्ष सुरेश भाई ठक्कर ने बताया कि इस वर्ष त्योहारी कारोबार में तेजी के पीछे जीएसटी दरों में कटौती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वदेशी अपनाओ' आह्वान की अहम भूमिका रही है।
ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा के मुताबिक, देशभर में सोने-चांदी का कारोबार ₹66,000 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। दिल्ली और मुंबई बुलियन बाजारों में काफी रौनक रही। कीमतों में हल्की वृद्धि के बावजूद ग्राहकों ने हल्के वजन के आभूषणों, पारंपरिक गहनों और चांदी के सिक्कों की खरीदारी को प्राथमिकता दी। धनतेरस के दिन सोने का भाव लगभग ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव ₹1.90 लाख प्रति किलोग्राम रहा। धनतेरस से पहले ये कीमतें क्रमशः लगभग ₹1.35 लाख और ₹1.75लाख थीं।
AIJGF के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में सोने के धातु का आयात ₹1,82,995 करोड़ और चांदी का आयात ₹22,923 करोड़ रहा। वहीं, तैयार सोने के आभूषणों का निर्यात ₹59,266 करोड़ तथा चांदी के आभूषणों का निर्यात ₹6,909 करोड़ दर्ज किया गया।
धनतेरस पर सोने-चांदी के अलावा बर्तन, झाड़ू, मोबाइल, लैपटॉप, टेलीविजन, घरेलू उपकरणों और वाहनों की भी जमकर खरीदारी हुई। पारंपरिक बाजारों, ज्वैलरी प्रतिष्ठानों, ऑटोमोबाइल शोरूम और स्थानीय दुकानों में ग्राहकों की उल्लेखनीय भीड़ रही।
कैट पदाधिकारियों के अनुसार, भारतीय उत्पादों के प्रति बढ़ते आकर्षण से घरेलू निर्माताओं, छोटे व्यापारियों, कारीगरों और एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहन मिला है। इससे रोजगार के अवसरों और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिली है। कैट ने कहा कि धनतेरस और दीपावली अब धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सवों के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले महत्वपूर्ण अवसर बन चुके हैं।