Devendra Fadnavis Slams Congress: महाराष्ट्र की राजनीति में जुबानी जंग अक्सर तीखी होती है, लेकिन हाल ही में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर दिए गए एक बयान ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है।
कांग्रेस द्वारा सुनेत्रा पवार के लिए गुंगी गुड़िया शब्द का इस्तेमाल किए जाने पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद कड़ा और तीखा पलटवार किया है। फडणवीस ने कांग्रेस की इस राजनीति को 'स्तरहीन' करार देते हुए उन्हें आईना दिखाया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे विवाद पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस आजकल केवल चर्चा में बने रहने और खबरों में झलखने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रही है। फडणवीस ने कटाक्ष करते हुए कहा, बदनाम हुए तो क्या हुआ, नाम तो हुआ... वाली मानसिकता के साथ कांग्रेस के नेता इस तरह की निम्न-स्तरीय टिप्पणियां कर रहे हैं।
फडणवीस ने आगे कहा कि आज के समय में कांग्रेस को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा है और जनता की ओर से उन्हें कोई रिस्पॉन्स भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में न्यूज में बने रहने के लिए वे इस हद तक गिर गए हैं। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास में शायद ही कभी किसी महिला नेता के खिलाफ इतने निचले स्तर पर जाकर टिप्पणी की गई हो।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार का उल्लेख 'गुंगी गुड़िया' के रूप में किया। इतना ही नहीं, कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस अपमानजनक टिप्पणी का समर्थन भी किया। सपकाल ने तर्क दिया कि सुनेत्रा पवार को इस आलोचना को सकारात्मक रूप से लेना चाहिए और खुद को गुंगी गुड़िया नहीं बल्कि दुर्गा साबित करते हुए वित्त विभाग की जिम्मेदारी खुद संभालनी चाहिए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ-साथ अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस की इस हरकत की जमकर निंदा की है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे बुद्धि भ्रष्ट होना करार दिया और कहा कि यह केवल सुनेत्रा पवार का अपमान नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की तमाम माताओं और बहनों का अपमान है। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में भी जब कांग्रेस ने लाडकी बहिन योजना को लेकर इसी तरह की अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था, तब राज्य की महिलाओं ने उन्हें सबक सिखाया था।
वहीं, भाजपा नेता चित्रा वाघ ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, जब दलीलें खत्म हो जाती हैं, तब चीखें शुरू हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अब कोई ठोस मुद्दा या विचार नहीं बचा है, इसलिए वे शिवराजी और अपमानजनक भाषा पर उतर आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की जनता महिलाओं का अपमान करने वाली इस तरह की 'लाचारी की राजनीति' को कभी माफ नहीं करेगी।