Mumbai Wireless Power Transmission: मुंबई ज्यादातर साइंस फिक्शन तक ही सीमित एक भविष्यवादी विचार अब वास्तविकता के बेहद करीब आता दिख रहा है। यह विचार है पृथ्वी की कक्षा में घूमते सोलर पावर स्टेशन से वायरलेस तरीके से पृथ्वी पर बिजली भेजना। चीनी शोधकर्ताओं ने सफलतापूर्वक एक ऐसे सिस्टम का परीक्षण किया है, जो एक ही समय में कई चलती-फिरती चीजों तक बिजली पहुंचाने में सक्षम है। शियान में जिडियन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक वायरलेस पावर ट्रांसमिशन प्लेटफॉर्म विकसित किया है।
यह प्लेटफॉर्म चलती-फिरती चीजों को सटीक रूप से ट्रैक कर लंबी दूरी तक किलोवॉट स्तर की माइक्रोवेव एनर्जी भेज सकता है। इस सफलता को चीन की उन दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिनके तहत वह अंतरिक्ष आधारित सोलर पावर स्टेशन बनाना चाहता है। ये स्टेशन पृथ्वी की कक्षा में एनर्जी इकट्ठा करेंगे और उसे वायरलेस तरीके से सैटेलाइट, ड्रोन, चंद्रमा पर बने बेस और शायद पृथ्वी तक भी भेजेंगे।
इस प्रोजेक्ट के केंद्र में 75 मीटर ऊंचा एक टावर है। इसे एक ग्राउंड वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म के हिस्से के तौर पर बनाया गया है। इसका मकसद कक्षा में तैनात करने से पहले अंतरिक्ष-आधारित एनर्जी ट्रांसमिशन की पूरी प्रक्रिया का सिमुलेशन यानी नकली परीक्षण करना है। इस सिस्टम ने लगभग 100 मीटर की दूरी तक 1,180 वॉट बिजली भेजी और साथ ही माइक्रोवेव बीम पर सटीक कंट्रोल भी बनाए रखा।
यह भी पढ़ें:-अहिल्यादेवी जयंती कार्यक्रम में सीएम देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान, मराठा समाज को कही ये बात
शोधकर्ताओं ने 30 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ रहे एक चलते-फिरते ड्रोन को भी सफलतापूर्वक बिजली दी। उन्होंने लगभग 30 मीटर की दूरी से 143 वॉट बिजली भेजी, चलती फिरती चीजों को लगातार ट्रैक करने और उन्हें बिजली देने की यह क्षमता वायरलेस एनर्जी ट्रांसमिशन सिस्टम में आने वाली सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक मानी जाती है। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व वरिष्ठ इंजीनियर डुआन बाओयान कर रहे है।