AC Coach Honeymoon Decoration: मध्य रेल्वे की बल्हारशाह–मुंबई नांदेड़ग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कोच में एक नवविवाहित जोड़े के लिए कूपे को 'हनीमून स्टाइल' में सजाने का एक बेहद अजीबोगरीब और नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। चलती ट्रेन के भीतर सुरक्षा व्यवस्था में हुई इस बड़ी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए रेलवे प्रशासन ने त्वरित व सख्त कार्रवाई की है।
रेलवे ने इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में ड्यूटी पर तैनात मुख्य टिकट निरीक्षक (CTI) गिरीश कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। इसके साथ ही इस पूरे घटनाक्रम के पीछे जिम्मेदार अन्य सुरक्षाकर्मियों और स्टाफ की भूमिका का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 6 जुलाई 2026 की है। शुभम और सोनाली नामक एक नवविवाहित दंपती ने छत्रपति संभाजीनगर से जालना होते हुए मुंबई जाने के लिए नांदेड़ग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी (First AC) कोच के 'जी' कूपे में बर्थ संख्या 19 और 20 बुक कराई थी। अपनी शादी के बाद के इस सफर को यादगार और खास बनाने के लिए इस जोड़े ने एक अनोखा तरीका अपनाया।
दंपती ने निजी तौर पर जालना के 'राहत डेकोरेटर' नाम की एक एजेंसी से ऑनलाइन संपर्क किया और ट्रेन के कूपे को अंदर से सजाने की डील पक्की की। इसके बाद, जैसे ही ट्रेन जालना स्टेशन पर रुकी, डेकोरेटर का एक कर्मचारी बिना किसी आधिकारिक रेलवे पास या अनुमति के सीधे फर्स्ट एसी कोच के भीतर दाखिल हो गया। उसने कूपे को लाल-गुलाबी गुब्बारों, ताजे फूलों और अन्य सजावटी सामग्रियों से पूरी तरह 'हनीमून स्टाइल' में सजा दिया।
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फर्स्ट एसी कोच की इस भव्य सजावट की तस्वीरें और जानकारी जैसे ही रेलवे के उच्च अधिकारियों तक पहुंची, विभाग में हड़कंप मच गया। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा है कि किसी भी बाहरी या निजी व्यक्ति का बिना किसी वैध टिकट, वेंडर पास या आधिकारिक लिखित अनुमति के फर्स्ट एसी कोच जैसे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल डिब्बे में प्रवेश करना भारतीय रेलवे के सुरक्षा नियमों का सीधा और गंभीर उल्लंघन है।
इसी सुरक्षा चूक को आधार बनाते हुए प्रशासन ने ट्रेन में ड्यूटी पर मौजूद सीटीआई गिरीश कुमार को अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से न निभाने और बाहरी व्यक्ति को रोकने में नाकाम रहने के चलते तुरंत सस्पेंड कर दिया।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे मामले की जड़ तक जाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। इस जांच में मुख्य रूप से यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और कोच अटेंडेंट की मौजूदगी के बावजूद एक बाहरी व्यक्ति इतना सारा सजावटी सामान लेकर फर्स्ट एसी कोच के अंदर कैसे और किसकी मदद से प्रवेश कर गया?
क्या इस काम के लिए ऑन-ड्यूटी स्टाफ को कोई रिश्वत दी गई थी या यह केवल लापरवाही का मामला है? रेलवे प्रशासन का कहना है कि जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद डेकोरेटर एजेंसी और लापरवाही बरतने वाले अन्य रेल कर्मियों के खिलाफ भी रेलवे अधिनियम के तहत सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।