बॉम्बे हाईकोर्ट और हड़ताल कर रहे डॉक्टर (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
मुंबई

काम नहीं करना तो वेतन लेना भी बंद करें, बॉम्बे हाईकोर्ट ने डाक्टरों को दिया तत्काल हड़ताल खत्म करने का आदेश

Bombay High Court Order On Doctors Strike: बॉम्बे हाईकोर्ट ने हड़ताली डॉक्टरों को कड़ी फटकार लगाते हुए तुरंत काम पर लौटने का आदेश दिया। कहा- काम नहीं तो वेतन भी न लें।

अनिल सिंह

High Court Order On Doctors Strike: महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन 'एमएआरडी' (MARD) द्वारा बुलाई गई अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बॉम्बे उच्च न्यायालय (बॉम्बे हाईकोर्ट) ने कड़ा रुख अपनाया है। होमियोपैथी (BHMS) डॉक्टरों को एलोपैथी चिकित्सा पंजीकरण देने के विरोध में काम बंद कर हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों को अदालत ने तत्काल प्रभाव से हड़ताल समाप्त करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए डॉक्टरों से कहा, "यदि आपने मरीजों का इलाज और काम बंद कर दिया है, तो सरकार से वेतन लेना भी बंद कर दीजिए।"

क्या मरीजों की सेवा न करना आपको अच्छा लगता है?

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने एमएआरडी के प्रतिनिधियों और डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए पूछा कि क्या इस तरह मरीजों का इलाज करने से इनकार करना सही है?

अदालत ने पूछा, "क्या आपको अच्छा लग रहा है कि गरीब और जरूरतमंद मरीज अस्पतालों में बिना इलाज के भटक रहे हैं? हम आपकी मांगों और आपत्तियों को सुनने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए पहले आपको तुरंत हड़ताल समाप्त कर काम पर लौटना होगा।" कोर्ट ने साफ किया कि काम पर लौटने के बाद ही मामले की जल्द से जल्द सुनवाई संभव होगी।

क्या है पूरा विवाद और डॉक्टरों की मुख्य मांगें?

दरअसल, यह पूरा विवाद सीसीएमपी (CCMP) सर्टिफिकेट कोर्स पूरा कर चुके बीएचएमएस (BHMS) होमियोपैथिक डॉक्टरों को 'महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल' में पंजीकृत करने के सरकार के प्रस्ताव से जुड़ा है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और एमएआरडी का तर्क है कि आधुनिक चिकित्सा (एलोपैथी) में अर्हताहीन डॉक्टरों को इस तरह का पंजीकरण देना मरीज सुरक्षा और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ खिलवाड़ है। इसके अलावा रेजिडेंट डॉक्टर अपनी कई लंबित वेतन और भत्तों संबंधी मांगों को लेकर भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

अगली सुनवाई 8 सितंबर को तय

एमएआरडी ने अदालत से गुहार लगाई थी कि जब तक इस मुद्दे पर कोई अंतिम अदालती फैसला नहीं आ जाता, तब तक पंजीकरण प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं को ठप नहीं किया जा सकता। बॉम्बे हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को बिना शर्त काम पर लौटने का कड़ा आदेश देते हुए इस संवेदनशील मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 8 सितंबर के लिए सूचीबद्ध की है।

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